UP News : सिद्धार्थनगर के कालानमक धान का क्रेज बढ़ा, बीज की बिक्री में 20 प्रतिशत का इजाफा

सिद्धार्थनगर के कालानमक धान का क्रेज बढ़ा, बीज की बिक्री में 20 प्रतिशत का इजाफा
UPT | कालानमक धान

Jul 11, 2024 00:58

कालानमक धान की मांग अन्य राज्यों में भी बढ़ रही है। इस वर्ष छत्तीसगढ़, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और हरियाणा में मांग बढ़ने के साथ बीज की अच्छी-खासी बिक्री हुई है।

Jul 11, 2024 00:58

Short Highlights
  • स्वाद, सुगंध और पौष्टिकता में बेमिसाल है कालानमक धान
  • कालानमक के लिए बनाया गया कॉमन फैसिलिटी सेंटर  
  • किसानों को उपलब्ध कराई जाएंगी 15 नई प्रजातियां 
Lucknow News : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार ने जब से कालानमक धान को सिद्धार्थनगर का ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) घोषित किया है, तब से इसकी मांग बढ़ती जा रहा है। पिछले वर्ष की तुलना में इस साल बीज की बिक्री में लगभग 20 प्रतिशत का इजाफा हुआ है, जो इसकी बढ़ती मांग को दर्शाता है। स्वाद, सुगंध और पौष्टिकता में बेमिसाल होने के कारण, कालानमक धान की मांग अन्य राज्यों में भी बढ़ रही है। इस वर्ष छत्तीसगढ़, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और हरियाणा में मांग बढ़ने के साथ बीज की अच्छी-खासी बिक्री हुई है।

अन्य राज्यों में भी बढ़ रही मांग
पद्मश्री से सम्मानित कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरसी चौधरी कालानमक धान पर दो दशक से काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास जीआई (जियोग्राफिकल इंडिकेशन) वाले पूर्वांचल के 11 जिलों से बीज की जितनी मांग है, उतनी ही मांग छत्तीसगढ़ से भी है। गोरखपुर के प्रमुख बीज विक्रेता, उत्तम बीज भंडार के श्रद्धानंद तिवारी, भी इस बात की पुष्टि करते हैं। उनके अनुसार, पिछले साल की तुलना में इस साल कालानमक धान के बीज की मांग में वृद्धि हुई है। इसके कारण आपूर्तिकर्ता कंपनियों की संख्या में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिससे प्रतियोगिता के चलते दाम भी वाजिब हैं। कालानमक धान के प्रति बढ़ती रुचि का मुख्य कारण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का निजी प्रयास है। उत्तर प्रदेश में जीआई वाले जिलों के अलावा बलिया, आजमगढ़, जौनपुर, सुल्तानपुर, प्रयागराज, उन्नाव, और प्रतापगढ़ जैसे जिलों से भी कालानमक धान के बीज की अच्छी मांग आ रही है। इसके अलावा, कुछ अन्य प्रदेशों और जिलों से भी मामूली मांग की जा रही है।

सात वर्षों में चार गुना हुआ रकबा
कृषि विशेषज्ञ डॉ. आरसी चौधरी के अनुसार, पिछले साल जीआई-मान्यता प्राप्त जिलों में कालानमक धान की खेती का क्षेत्र लगभग 80 हजार  हेक्टेयर था। 2024 में अब तक के बीज बिक्री के आंकड़ों के आधार पर यह क्षेत्र एक लाख हेक्टेयर तक पहुंचने की संभावना है। अगर अन्य जिलों और प्रदेशों को भी शामिल किया जाए, तो यह क्षेत्र अपेक्षा से कहीं अधिक हो सकता है। पिछले सात वर्षों में इस धान की खेती का क्षेत्र लगभग चार गुना बढ़ गया है। 2016 में यह क्षेत्र केवल 2,200 हेक्टेयर था, जो 2022 में बढ़कर 70 हजार  हेक्टेयर से अधिक हो गया। 2024 में इसके एक लाख हेक्टेयर से अधिक होने की उम्मीद है।

धान की लोकप्रियता में सरकार की बड़ी भूमिका
कालानमक धान की इस लोकप्रियता के पीछे योगी सरकार की बड़ी भूमिका है। सिद्धार्थनगर का ओडीओपी घोषित करने के बाद से सरकार ने इसे लोकप्रिय बनाने के लिए कई प्रयास किए। मुख्यमंत्री के निर्देश पर शासन के उच्चाधिकारियों ने किसानों के साथ सिद्धार्थनगर जाकर बैठकों के साथ फील्ड विजिट किया। किसानों से उनकी समस्याएं जानीं। सरकार की ओर से कपिलवस्तु में कालानमक महोत्सव का शुभारंभ खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। कुशीनगर में आयोजित अंतराष्ट्रीय बौद्ध महोत्सव में आये बौद्ध देश के अतिथियों को उपहार में कालानमक चावल दिया गया।

कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनाया गया 
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो साल पहले सिद्धार्थनगर में कालानमक के लिए कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) का लोकार्पण भी किया था। इसमें कालानमक के ग्रेडिंग, पैकिंग से लेकर हर चीज की अत्याधुनिक सुविधा एक ही स्थान पर मिल जाती है। दो साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कालानमक को लोकप्रिय बनाने के लिए वहां के तत्कालीन जिलाधिकारी दीपक मीणा को सम्मानित भी किया था।

बेहतर प्रजातियों के विकास के लिए शोध
किसानों में लोकप्रियता देखते हुए कालानमक धान के अनुसंधान पर भी सरकार जोर दे रही है। वाराणसी स्थित इरी (इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट) इस पर शोध भी किया जा रहा हैं। वह कई प्रजातियों पर ट्रायल कर रहा है। ट्रायल में जो प्रजाति बेहतर निकलेगी उसे किसानों में लोकप्रिय किया जाएगा। उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों के बीच काम करने वाली संस्था सस्टेनेबल ह्यूमन डेवलेपमेंट को इरी ने पिछले साल कालानमक की 15 प्रजातियों को एक जगह छोटे-छोटे रकबे में डिमांस्ट्रेशन के लिए उपलब्ध कराया है। कटाई पर इसमें से जो भी सर्वश्रेष्ठ होगा उसे किसानों में लोकप्रिय बनाया जाएगा। एनबीआरआई भी कालानमक पर एक शोध प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। 

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