तलाक की कीमत तुम क्या जानो बाबू : तीन करोड़ रुपये और नोएडा में एक फ्लैट, पति ने दिया ऑफर, कोर्ट ने माना

तीन करोड़ रुपये और नोएडा में एक फ्लैट, पति ने दिया ऑफर, कोर्ट ने माना
फ़ाइल फोटो | इलाहाबाद उच्च न्यायालय

Jul 09, 2024 19:17

कोर्ट ने पति के ऑफर को मंजूर कर लिया। वह शादी को खत्म करने के लिए खुद तीन करोड़ रुपये और नोएडा में एक फ्लैट देने को राजी हुआ है।

Jul 09, 2024 19:17

Noida News : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक लंबे समय से चल रहे वैवाहिक विवाद में महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। यह मामला 30 वर्षों से विवाहित एक जोड़े का था, जिनके दो बच्चे भी हैं। कोर्ट ने पति के ऑफर को मंजूर कर लिया। वह शादी को खत्म करने के लिए खुद तीन करोड़ रुपये और नोएडा में एक फ्लैट देने को राजी हुआ है।

पत्नी ने पति को घर से निकाला
कोर्ट में पेश किए गए तथ्यों के अनुसार, इस दंपति की शादी 1994 में हुई थी। पति फर्रुखाबाद से और पत्नी नोएडा से थी। साल 1999 में, पारिवारिक परिस्थितियों के कारण, पत्नी अपनी मां के साथ नोएडा में रहने लगी। पति ने नोएडा में एक फ्लैट खरीदा और उसे पत्नी के नाम पर रजिस्टर करवाया। साल 2007 में एक विवाद के बाद पत्नी ने पति को इस फ्लैट से निकाल दिया।

कानूनी प्रक्रिया ऐसे आगे बढ़ी
साल 2017 में गौतम बुद्ध नगर की फैमिली कोर्ट ने पति की तलाक की अर्जी खारिज कर दी। पति ने इस फैसले के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपील की। कई साल तक चली सुनवाई के बाद आखिरकार इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इसका निपटारा कर दिया। 

तलाक की ये शर्तें मंजूर 
न्यायालय ने तलाक को मंजूरी दे दी। तीन करोड़ रुपये एकमुश्त गुजारा राशि और नोएडा में स्थित वह फ्लैट जो पहले से ही पत्नी के नाम पर था, तलाक के एवज में देने होंगे। खास बात यह कि घर से निकालने वाली पत्नी से छुटकारा पाने के लिए पति ने स्वयं यह प्रस्ताव रखा था। पत्नी द्वारा साथ रहने की पेशकश को पति ने अस्वीकार कर दिया। न्यायालय ने आदेश दिया कि गुजारा राशि 6 सप्ताह के भीतर दी जानी चाहिए। इस समझौते के बाद पत्नी किसी अतिरिक्त राशि की मांग नहीं कर सकेगी।

Also Read

अवैध निर्माण पर प्राधिकरण सख्त, बिल्डर को अंतिम नोटिस

20 Jul 2024 05:29 PM

गौतमबुद्ध नगर नोएडा जेपी अमन सोसायटी में चलेगा बुलडोजर : अवैध निर्माण पर प्राधिकरण सख्त, बिल्डर को अंतिम नोटिस

नोएडा एक्सप्रेसवे के निकट सेक्टर-151 स्थित जेपी अमन सोसायटी में एक विवाद ने तूल पकड़ लिया है। अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (एओए) और बिल्डर के बीच अस्थायी कार्यालय को लेकर चल रहे विवाद के बीच, नोएडा प्राधिकरण ने मामले में हस्तक्षेप किया है। और पढ़ें