Jagannath Rath yatra : काशी के लाडले हैं भगवान जगन्नाथ, आते हैं डोली में और जाते हैं कार में सवार होकर

काशी के लाडले हैं भगवान जगन्नाथ, आते हैं डोली में और जाते हैं कार में सवार होकर
UPT | रथ को घेरे हुए काशी के भत्त

Jul 09, 2024 16:02

काशी की परंपरा, प्रथा और रस्में पूरी दुनिया में अनोखी हैं। भगवान जगन्नाथ काशी के इकलौते देवता हैं, जो चार दिनों में तीन वाहन की सवारी करते हैं।

Jul 09, 2024 16:02

Short Highlights
  • चार दिनों में तीन वाहन की सवारी करते हैं भगवान जगन्नाथ
  • 2010 तक भगवान कहार पर सवार होकर निकलते थे
Varanasi news : भगवान जगन्नाथ काशी के इकलौते देवता हैं, जो चार दिनों में तीन वाहन की सवारी करते हैं। भगवान जगन्नाथ डोली में सवार होकर भक्तों को दर्शन देने आते हैं और जब विदाई की बेला होती है तो कार में सवार होकर मंदिर परिसर जाते हैं। ट्रस्ट श्री जगन्नाथ के दीपक शापुरी ने बताया कि 2010 तक भगवान कहार पर सवार होकर निकलते थे इधर, 10 साल से कहार नहीं मिलने के कारण भगवान को पुजारी कार में लेकर जाते हैं। 

काशी की अनोखी परंपरा
काशी की परंपरा, प्रथा और रस्में पूरी दुनिया में अनोखी हैं। इसलिए यहां नाथों के नाथ भी बालसुलभ भाव से भक्तों को दर्शन देते हैं। भक्तों के प्रेम में स्नान करके बीमार पड़ते हैं और अज्ञातवास पर चले जाते हैं। भक्त भगवान के स्वास्थ्य लाभ के लिए काढ़े का भोग लगाते हैं और भगवान जब स्वस्थ हो जाते हैं तो भक्तों से मिलने के लिए काशी की गलियों में निकल पड़ते हैं। 

लक्खा मेले की परंपरा
काशी के पहले लक्खा मेले की परंपराएं 222 सालों से निभाई जा रही हैं। इस रथयात्रा मेले में भक्त भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र के दर्शन करते हैं। इस बार, बीते शनिवार को भगवान सपरिवार डोली पर सवार होकर मंदिर के गर्भगृह से निकले और 13 मोहल्लों से डोली गुजरी। इसके बाद वे रथ पर सवार हुए और तीन दिनों तक भक्तों को दर्शन देंगे। अंत में, मंगलवार की देर रात को भगवान कार में सवार होकर मंदिर में लौट जाएंगे।

चार दिनों में तीन वाहनों की सवारी
यह काशी के इकलौते भगवान हैं जो वर्ष के चार दिनों में अलग-अलग तीन वाहन पर सवार होते हैं। डोली और रथ पर विराजमान भगवान के दर्शन तो हर कोई करता है लेकिन कार में सवार भगवान के दर्शन किसी को नहीं होते। मध्यरात्रि के बाद अपने नियत समय पर भगवान को रथ से उतारकर कार में विराजमान कराया जाता है। इसके बाद कार सीधे मंदिर परिसर में ही पहुंचकर रुकती है। इसके समय के बारे में सिर्फ और सिर्फ पुजारी व ट्रस्ट के पदाधिकारियों को ही पता होता है।

डोली उठाने वालों की होड़
स्वस्थ होने के बाद भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र जब काशी की गलियों में निकलते हैं तो डोली उठाने वालों की होड़ सी लग जाती है लेकिन रात के समय ना तो भक्त होते हैं और ना ही कोई डोली उठाने वाला। इसको देखते हुए बदलते समय के साथ परंपराओं में थोड़ा सा बदलाव करना पड़ा। पिछले 14 सालों से भगवान को कार में विराजमान कराकर मंदिर वापस लाया जाता है। इस दौरान मंदिर के पुजारी और चालक के अलावा कोई तीसरा व्यक्ति मौजूद नहीं होता है।

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