प्रदेश में इस बार महज एक विधानसभा सीट मिल्कीपुर (सुरक्षित) में उपचुनाव है। नामांकन की अंतिम तिथि 17 जनवरी है। भाजपा से प्रत्याशी का नाम फाइनल होना शेष है, लेकिन तैयारियां राज्यस्तरीय हैं। खुद 5 बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दौरा...
मिल्कीपुर उपचुनाव : पीडीए फार्मूले से सपा कर रही नाकेबंदी, भाजपा दिखा रही विकास
Jan 13, 2025 16:50
Jan 13, 2025 16:50
- मिल्कीपुर में भाजपा-सपा में सीधी टक्कर, लेकिन बसपा के वोटर बनाएंगे समीकरण।
- 1.20 लाख दलित मतदाताओं के बंटवारे पर टिकी हैं सभी की निगाहें।
- भाजपा और सपा अपनी प्रतिष्ठा से जोड़कर लड़ रही है उपचुनाव।
Ayodhya News : प्रदेश में इस बार महज एक विधानसभा सीट मिल्कीपुर (सुरक्षित) में उपचुनाव है। नामांकन की अंतिम तिथि 17 जनवरी है। भाजपा से प्रत्याशी का नाम फाइनल होना शेष है, लेकिन तैयारियां राज्यस्तरीय हैं। खुद 5 बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दौरा कर चुके हैं। जबकि सीधी टक्कर में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी व सांसद अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद हैं। इनकी जीत के लिए लोकसभा चुनाव के फार्मूले यानी पीडीए से विपक्षी गठबंधन के साथ सपा वोटरों को रिझाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है। जिस क्षेत्र में जिन जातियों की बहुलता है, वहां वैसी ही टोली सपा प्रत्याशी के पक्ष में जनसम्पर्क कर रही है। जिससे मुकाबले को वोटर दिलचस्प बना दिए हैं।
किसका खेल बिगाड़ेगी बसपा
मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र में 03 लाख 70 हजार 829 कुल मतदाता हैं। 1.20 लाख की संख्या में दलित मतदाताओं वाली इस सीट पर उपचुनाव में बहुजन समाज पार्टी अभी तक कोई बड़ा संकेत नहीं कर रही है। हालांकि प्रभारी को प्रत्याशी बनाने की बसपा के फॉर्मूले को मानें तो राम गोपाल ही चुनाव लड़ेंगे। ये सीट इसलिए भी अहम हो जाती है कि राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा और अयोध्या में तमाम विकास कार्यों के बाद भी लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को यहां हार का सामना पड़ा था।
हिसाब बराबर करने डटी है भाजपा
लोकसभा में हार का हिसाब भाजपा अब मिल्कीपुर में चुनाव जीतकर बराबर करना चाहती है। खास बात यह कि इस सीट से 2022 में विधायक चुने गए अवधेश प्रसाद ही 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा को पस्त कर प्रदेश ही नहीं, पूरे देश दुनिया में हलचल मचा दी थी। उन्हीं के बेटे अजीत प्रसाद को समाजवादी पार्टी ने अपना प्रत्याशी घोषित किया है। क्योंकि सपा भी इस सीट की अहमियत अच्छी तरह से समझ रही है। ऐसे में दोनों दलों की नजर बसपा के वोटरों पर लगी है। मिल्कीपुर सीट सपा सांसद अवधेश प्रसाद के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। हालात को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी अब तक अपने उम्मीदवार का नाम तय नहीं कर सकी है। इस सीट पर जीत की जिम्मेदारी ख़ुद सीएम योगी ने अपने हाथों में ले रखी है। लोकसभा चुनाव के बाद से वह दर्जनभर दौरा कर चुके हैं।
2022 के परिणामों का किया अध्ययन
मिल्कीपुर में 2022 विधानसभा चुनाव के सियासी समीकरण की बात करें तो इस चुनाव में चार प्रमुख दल, बीजेपी, कांग्रेस, सपा और बसपा चारों अलग-अलग चुनाव लड़े थे। इस सीट से सपा के अवधेश प्रसाद ने 12,913 वोटों से जीत दर्ज की थी। जबकि कांग्रेस और बसपा को कुल मिलाकर 17,553 वोट मिले थे। यानी बसपा और कांग्रेस का वोटर इस उपचुनाव में बड़ी भूमिका निभा सकता है। यही कारण है कि इस बार मिल्कीपुर में सपा-बीजेपी के बीच सीधी टक्कर है। कांग्रेस इस चुनाव में सपा का समर्थन कर रही है। दोनों दलों की नजर अब बसपा के वोटरों पर है। आमने-सामने की इस लड़ाई में जिस ओर इन मतदाताओं का रुख होगा, वो दल की जीत में अहम भूमिका निभाएगा। बसपा के वोटों का बंटवारा यहां काफी अहम हो सकता है। पार्टी ने प्रदेश के छह मंत्रियों को इस उपचुनाव में उतार दिया है। दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक को भी समय-समय पर यहां आने के निर्देश दिए गए हैं।
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