यूपीपीसीएल ग्रामीण उपभोक्ताओं को लालटेन युग में जीने को कर रहा मजबूर : उपभोक्ता परिषद सुनवाई में खुलेगा पोल

उपभोक्ता परिषद सुनवाई में खुलेगा पोल
UPT | electricity

Jul 10, 2024 05:56

उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश में सात उत्पादन इकाइयों को लो डिमांड का हवाला देकर बंद कर दिया गया है। ऐसा इसलिए किया गया है, जिससे ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली नहीं देनी पड़े।

Jul 10, 2024 05:56

Short Highlights
  • लखनऊ में 10 जुलाई को यूपीपीसीएल-एसएलडीस की होगी सुनवाई 
  • उपभोक्ता परिषद ने आंकड़ों के साथ की तैयारी
Lucknow News: प्रदेश में ग्रामीण बिजली उपभोक्ताओं के लिए छह घंटे बिजली कटौती की रोस्टर प्रणाली को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद बड़ी लड़ाई का मन बना चुका है। संगठन के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने मंगलवार को कहा कि पावर कारपोरेशन का कानून बेहद अजीब है। एक तरफ पर्याप्त बिजली उपलब्ध है और उसको दूसरे राज्यों में बेचकर कमाई की जा रही है तो दूसरी ओर अपने ही उपभोक्ताओं को इससे वंचित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बिजली की उपलब्धता होते हुए भी ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं को घोषित तौर पर छह घंटे लालटेन युग में रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है। ये प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं का अपमान है।

इस वजह से उत्पाइन इकाइयां बंद करने के आरोप
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन अरविंद कुमार की अध्यक्षता में पहली जनसुनवाई में बिजली दरों को बढ़ाने का विरोध पुख्ता तरीके से किया गया है। ये लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। राजधानी लखनऊ में 10 जुलाई को यूपीपीसीएल और एसएलडीस की सुनवाई में इस मामले को पुरजोर तरीके से उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सात उत्पादन इकाइयों को लो डिमांड का हवाला देकर बंद कर दिया गया है। ऐसा इसलिए किया गया है, जिससे ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली नहीं देनी पड़े। विद्युत नियामक आयोग की ट्रांसमिशन व यूपीएसएलडीस सुनवाई में बुधवार को उपभोक्ता परिषद बिजली कंपनियों की पोल खोलेगा।

बिजली खरीद की पारदर्शी नीति नहीं होने से किया जा रहा खेल
उपभोक्ता परिषद पावर कॉरपोरेशन की तरफ से बिजली की खरीद और बिक्री में घोटाले की आशंका जता चुका है। संगठन ने मुख्यमंत्री से इसकी सीबीआई जांच की मांग की है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष ने दलील दी है कि प्रदेश की बिजली कंपनियों के लिए वर्ष 2023-24 में 2951 मिलियन यूनिट बिजली दूसरे राज्यों से 2741 करोड़ रुपए में खरीदी गई। वहीं अपनी दो गुना अधिक सरप्लस 6397 मिलियन यूनिट बिजली 2765 करोड़ में बेच दी गई। इसी तरह 2024-25 में 1192 मिलियन यूनिट बिजली 473 करोड़ रुपए में बेची गई, जबकि दूसरे राज्यों से 3243 मिलियन यूनिट 3096 करोड़ रुपये में खरीदी गई। उपभोक्ता परिषद ने बिजली खरीद की कोई पारदर्शी नीति नहीं होने को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं आयोग के चेयरमैन ने बिजली कंपनियों से योजनाबद्ध तरीके से बिजली खरीदने के निर्देश दिए हैं।

नियामक आयोग इन शहरों में करेगा सुनवाई
  • 10 जुलाई को यूपीपीसीएल व एसएलडीस की सुनवाई लखनऊ में 
  • 11 जुलाई को मध्यांचल की सुनवाई लखनऊ में 
  • 16 जुलाई को पूर्वांचल की सुनवाई वाराणसी में 
  • 18 जुलाई को दक्षिणांचल की सुनवाई आगरा में
  • 19 जुलाई को नोएडा पावर कंपनी ग्रेटर की सुनवाई नोएडा में 
  • 20 जुलाई को पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम की सुनवाई मेरठ में

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