उपभोक्ता परिषद का पावर कारपोरेशन में अफसरों की नियुक्ति के नाम पर भ्रष्टाचार का आरोप : सीबीआई जांच की मांग

सीबीआई जांच की मांग
UPT | यूपीपीटीसीएल की बैठक हुई।

Jul 11, 2024 00:56

अवधेश वर्मा ने कहा कि यूपीपीसीएल ने लैटरल एंट्री लेखा विंग में सीधे डिप्टी सीईओ से लेकर सीजीएम तक की ढाई से तीन लाख में भर्ती कर ली। उन्होंने इसे मनमानी बताते हुए कई सवाल खड़े किए।

Jul 11, 2024 00:56

Short Highlights
  • लैटरल एंट्री लेखा विंग में डिप्टी सीईओ से लेकर सीजीएम तक की लाखों में की गई भर्ती 
  • बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का लगाया आरोप
Lucknow News : उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीटीसीएल) की बैठक में बुधवार को राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने कई गंभीर आरोप लगाकर अधिकारियों को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास किया। यूपी राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा इसमें शामिल हुए। उन्होंने फिजूल खर्जी का मामला पुरजोर तरीके से उठाया और इस मामले में अधिकारियों पर मनमानी करने का आरोप लगाया।

डिप्टी सीईओ से लेकर सीजीएम तक की ढाई से तीन लाख में भर्ती 
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि मनमानी तरीके से मनचाहे वेतन पर निदेशक नियुक्त करना पूरी तरह से गलत है। उन्होंने इस पर कड़ा ऐतराज जताया। अवधेश वर्मा ने कहा कि यूपीपीसीएल ने लैटरल एंट्री लेखा विंग में सीधे डिप्टी सीईओ से लेकर सीजीएम तक की ढाई से तीन लाख में भर्ती कर ली। उन्होंने इसे मनमानी बताते हुए कई सवाल खड़े किए। साथ ही प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की मांग की। अवधेश वर्मा ने इसमें बड़े भ्रष्टाचार के खुलासा होने का दावा किया। उन्होंने ​कहा कि संगठन प्रदेश के उपभोक्ताओं का पक्ष किसी मामले को उठाने से पीछे नहीं हटेगा। हम आर पार की संवैधानिक लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। 

पावर कारपोरेशन अध्यक्ष के नहीं पहुंचने पर भी उठाए सवाल 
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष ने सुनवाई में पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष के नहीं पहुंचने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष के लिए विद्युत नियामक आयोग की बैठक से ज्यादा महत्वपूर्ण पावर कारपोरेशन की बैठक है। नियामक आयोग इस पर निर्णय करते हुए निर्देश जारी करे। अवधेश वर्मा ने कहा कि पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन की स्थापित क्षमता और उपभोक्ताओं द्वारा लिए गए भार में 2 करोड़ का अंतर है। ऐसे में कैसे उपभोक्ताओं को सुचार बिजली आपूर्ति मिल सकती है। बिजली सिस्टम मिसमैच है, पहले सिस्टम को दुरुस्त किया जाए, फिर टैरिफ बढ़ाने की बात हो।

एक अफसर को कई पदों की जिम्मेदारी
उपभोक्ता परिषद ने यूपीएसएलडीसी के स्वतंत्र होने का भी मुद्दा उठाया। कहा गया कि यूपीएसएलडीसी, पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन, विद्युत उत्पादन निगम सभी के अध्यक्ष की​ जिम्मेदारी एक अफसर पर होगी तो पारदर्शी निर्णय कैसे होगा। लो डिमांड का हवाला देते हुए सात उत्पादन इकाइयां बंद कर दी गईं। कोई देखने वाला नहीं है, गांव की जनता पसीना बहा रहा है। आयोग इस पर तत्काल निर्णय करे।

नियामक आयोग के चेयरमैन ने माना गंभीर प्रकरण 
उपभोक्ता परिषद ने इस दौरान कार्यों की गुणवत्ता और नवनिर्मित ट्रांसमिशन केंद्रों के सक्रिय किए जाने का मामला भी उठाया। विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन अरविंद कुमार ने कहा कि उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने जो बातें रखी हैं और आरोप लगाए हैं, वह बेहद गंभीर है। इस प्रकरण पर विचार किया जाएगा।

यूपीपीसीएल को घेरने में जुटा उपभोक्ता परिषद
उपभोक्ता परिषद विभिन्न मुद्दों पर यूपीपीसीएल को घेरने में जुटा हुआ है। संगठन ने प्रदेश में ग्रामीण बिजली उपभोक्ताओं के लिए छह घंटे बिजली कटौती की रोस्टर प्रणाली को लेकर कई आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि यूपीपीसीएल वास्तव में ग्रामीण उपभोक्तओं को पर्याप्त बिजली नहीं देना चाहता। इसलिए उसने जानबूझकर सात उत्पादन इकाइयां 15 जुलाई तक बंद कर दी हैं। एक तरफ दूसरे राज्यों को बिजली बेची जा रही है तो दूसरी ओर अपने ही उपभोक्ताओं को इससे वंचित किया जा रहा है। उन्हें लालटेन युग में रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने विद्युत नियामक आयोग की बैठक में उपभोक्ताओं के हित में लगातार अपना पक्ष मजबूती से रखने की बात कही है।

नियामक आयोग अब इन शहरों में करेगा सुनवाई
11 जुलाई को मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की सुनवाई लखनऊ में 
16 जुलाई को पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की सुनवाई वाराणसी में 
18 जुलाई को दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की सुनवाई आगरा में
19 जुलाई को नोएडा पावर कंपनी ग्रेटर की सुनवाई नोएडा में 
20 जुलाई को पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम की सुनवाई मेरठ में

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