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कोविशील्ड के बाद कोवैक्सिन के भी साइड इफेक्ट का दावा : बढ़ रहे सांस संबंधी इंफेक्शन, इस उम्र के लोगों को ज्यादा खतरा

बढ़ रहे सांस संबंधी इंफेक्शन, इस उम्र के लोगों को ज्यादा खतरा
सोशल मीडिया | कोवैक्सिन के भी साइड इफेक्ट का दावा

May 16, 2024 14:50

पहले दुनियाभर में एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को लेकर बवाल मचा। भारत में यह वैक्सीन कोविशील्ड के नाम से लगी थी। लेकिन अब भारत बायोटेक की बनाई हुई कोवैक्सीन के भी साइड इफेक्ट का दावा किया जा रहा है।

May 16, 2024 14:50

Short Highlights
  • कोवैक्सीन के साइड इफेक्ट का दावा
  • बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में हुई स्टडी
  • कोविशील्ड को लेकर भी मचा था बवाल
New Delhi : कोरोना वायरस के गंभीर खतरों से लोगों को बचाने के लिए वैज्ञानिकों ने दिन-रात की मेहनत से जो वैक्सीन तैयारी की, अब उनके साइफ इफेक्ट की भी बात सामने आ रही है। पहले दुनियाभर में एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को लेकर बवाल मचा। भारत में यह वैक्सीन कोविशील्ड के नाम से लगी थी। विपक्ष ने इसे लेकर खूब हंगामा भी काटा। लेकिन अब भारत बायोटेक की बनाई हुई कोवैक्सीन के भी साइड इफेक्ट का दावा किया जा रहा है।

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में हुई स्टडी
ये स्टडी बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के जेरिएट्रिक मेडिसिन विभाग द्वारा की गई। इसके लिए जनवरी 2022 से अगस्त 2023 तक 1024 लोगों को स्टडी में शामिल किया गया। इसमें 635 टीनएजर्स और 291 एडल्ट शामिल थे। स्टडी में पाया गया कि इसमें हिस्सा लेने वाले लगभग एक तिहाई लोगों में कोवैक्सीन के साइड इफेक्ट थे। स्टडी में ये भी पाया गया कि टीनएजर्स, खास तौर पर किशोरियों या किसी एलर्जी का सामना कर रहे लोगों को कोवैक्सीन से ज्यादा खतरा है।

वैक्सीन से कौन-कौन से साइड इफेक्ट?
स्टडी के अनुसार, 47.9 फीसदी यानी 304 किशोरों और 42.6 फीसदी यानी 124 वयस्कों में सांस संबंधी इंफेक्शन देखे गए। इसके अलावा 10.5 फीसदी टीनएजर्स में त्वचा से जुड़ी बीमारियां, 4.7% में नर्वस सिस्टम से जुड़े डिऑर्डर, 10.2% में जनरल डिस्ऑर्डर पाए गए। जबकि 8.9% वयस्कों में जनरल डिसऑर्डर, 5.8% में मांसपेशियों और हड्डियों से जुड़े डिस्ऑर्डर और 5.5% में नर्वस सिस्टम से जुड़े डिऑर्डर मिले।

किशोरियों को ज्यादा खतरा
स्टडी में पाया गया कि 4.6% अनियमित पीरियड्स की समस्या पाई गई। जिन किशोरियों को पहले से एलर्जी की समस्या थी, उनमें साइड इफेक्ट की संभावना कई गुना ज्यादा पाई गई। इसके अलावा स्टडी में शामिल लोगों में से 2.7% में आंखों से जुड़ी असामान्यताएं और 0.6% में हाइपोथायरायडिज्म देखा गया। जबकि 0.3 फीसदी प्रतिभागियों में स्ट्रोक और 0.1 फीसदी प्रतिभागियों में गुलियन बेरी सिंड्रोम की पहचान की गई।

पीएम मोदी ने लगवाए थे डोज
आपको बता दें कि कोवैक्सीन पूरी तरह से भारत में निर्मित वैक्सीन है। इसके भारत बायोटेक ने आईसीएमआर के साथ मिलकर किया है। भारत में कोवैक्सीन के करीब 36 करोड़ डोज लगे हैं। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कोवैक्सीन के दो डोज लगवाए थे। इसके पहले 2 मई को भारत बायोटेक कह चुका है कि कोवैक्सीन का ट्रायल से जुड़ी सभी स्टडीज और सेफ्टी फॉलोअप एक्टिविटीज में बेहतरीन सेफ्टी रिकॉर्ड है।

कोविशील्ड पर भी मचा था बवाल
ब्रिटेन की एक अदालत में एस्ट्राजेनेका कंपनी द्वारा ये मान लिए जाने के बाद कि कोविशील्ड के साइड इफेक्ट हैं, दुनियाभर में खूब बवाल मचा था। भारत में एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने तैयार की थी। विपक्ष ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा था कि उनकी वजह से देश के लोगों की जान खतरे में आ गई है। हालांकि विशेषज्ञ कहते हैं कि किसी भी वैक्सीन के साइड इफेक्ट होना सामान्य बात है। ऐसे लक्षण वैक्सीन लगने के कुछ ही महीनों के भीतर सामने आ जाते हैं।

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