अलीगढ़। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चंडौस से जुड़े 24 कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) और 16 संविदा एएनएम हड़ताल पर रहने से इलाके के कई आयुष्मान आरोग्य मंदिर और उप स्वास्थ्य केंद्रों पर ताले लटके हुए हैं। इस वजह से गांवों और आस-पास के ग्रामीणों को प्राथमिक इलाज के लिए दूर स्थित सीएचसी तक जाना पड़ रहा है।
सीएचओ 28 सितंबर से हड़ताल पर हैं जबकि 16 संविदा एएनएम 30 सितंबर से शामिल हुई हैं। हड़तालकारियों की मांग समान कार्य के बदले समान वेतन और अन्य सुविधाएँ हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका साफ असर दिख रहा है।
सेवाओं पर असर
सबसे ज्यादा परेशानी टीकाकरण अभियान और गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच में आ रही है। छोटी-मोटी बीमारियों के लिए पहले गांवों में उपलब्ध दवा और परामर्श अब नहीं मिल रहे। मरीजों को छोटे रोगों के इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक भागना पड़ रहा है।
गांव ओगीपुर निवासी लोकेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि उनका आयुष्मान आरोग्य मंदिर कई दिनों से बंद पड़ा है और छोटी-छोटी बीमारियों के लिए लोगों को चंडौस सीएचसी जाना पड़ता है। एलमपुरा निवासी महेश उपाध्याय ने कहा कि उनके गाँव का आयुष्मान आरोग्य मंदिर हड़ताल से पहले से बंद है और कई बार विभागीय अधिकारियों से शिकायत की गई, पर सुनवाई नहीं हुई।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. कुलदीप राजपुरी ने बताया कि सीएचओ और संविदा एएनएम की हड़ताल तथा आरोग्य मंदिरों के बंद होने से ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएँ प्रभावित होने की सूचना उच्चाधिकारी को दे दी गई है। उन्होंने कहा कि मामले का समाधान कराने के लिए उन्हें सूचित कर दिया गया है।
ग्रामीणों को स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं के बंद होने से वैक्सीन और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में दिक्कतें आ रही हैं। लोग और स्वास्थ्य अधिकारियों के बीच समन्वय से समस्या के समाधान की उम्मीद जताई जा रही है। आगे की कार्रवाई और हड़ताल खत्म होने की सूचना मिलने पर गांवों की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ फिर से शुरू हो सकेंगी।
स्रोत: अमर उजाला

