मुज़फ्फरनगर। मीरापुर के हैदरपुर वेटलैंड में जलकुंभी के उपयोग से घरेलू सामान बनाने के उद्देश्य से कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन वेटलैंड में स्वाभाविक रूप से उगने वाली जलकुंभी को संसाधित कर उपयोगी उत्पाद बनाकर स्थानीय लोगों को आय का साधन उपलब्ध कराने के लिए किया गया।
कार्यशाला का शुभारंभ जिला मजिस्ट्रेट उमेश मिश्रा, डीएफओ अभिनव राज और एसडीएम रश्मि लांबा ने संयुक्त रूप से किया। इको रूट फाउंडेशन की ओर से स्थानीय महिलाओं को जलकुंभी को सुखाने और उसके पत्तों से बुनकर उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
क्या-क्या बनाएंगे
प्रशिक्षण में बताया गया कि सुखाई हुई जलकुंभी के पत्तों से टोकरी, बैग, पर्स, चप्पल और अन्य घरेलू उपयोगी सामान तैयार किए जा सकते हैं। इससे वेटलैंड में पैदा होने वाली झाड़-घास का सदुपयोग होगा और स्थानीय महिलाओं को स्वरोजगार का अवसर मिलेगा।
- टोकरी
- बैग
- पर्स
- चप्पल एवं घरेलू उपयोगी सामान
इको रूट फाउंडेशन की डायरेक्टर अपर्णा तिवारी ने बताया कि महिलाओं को जलकुंभी से विभिन्न उत्पादों की बनावट और डिजाइन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों में इसी तरह के उद्यमों से महिलाओं की आय में बढ़ोतरी हुई है और मुज़फ्फरनगर में भी यही मॉडल अपनाया जाएगा।
कार्यक्रम में तहसीलदार मोनिका चौहान, वन क्षेत्राधिकारी अशोक शर्मा, रामराज थाना प्रभारी ज्ञानेंद्र सिरोही सहित बड़ी संख्या में अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने कहा कि वेटलैंड के संरक्षण के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन पर भी ध्यान दिया जाएगा।
आगे क्या होगा
आगामी दिनों में प्रशिक्षण लेने वाली महिलाओं की बनी वस्तुओं के लिए विपणन और कच्चे माल की आपको-नियोजन पर काम किया जाएगा। स्थानीय अधिकारियों और एनजीओ की मदद से उत्पादों की पहचान करवाने और बिक्री के रास्ते तलाशने की योजना है, जिससे महिलाओं की आमदनी में मजबूती आए।
स्रोत: अमर उजाला

