औरैया। जिले में चल रही तीन दिन की चक्रवाती बारिश से खेतों में भारी नुकसान हुआ है। कई इलाकों में धान, बाजरा और अन्य फसलें पानी में डूबकर बर्बाद हो गई हैं और किसान अब खेतों से पानी निकालने में जुट गए हैं।
खेतों में खड़ी पक चुकी धान की फसल के काली पड़ने की आशंका जताई जा रही है। भटौली गांव के किसान कल्लू सविता की धान की खड़ी फसल पानी में डूब गई थी। उन्होंने फसल बचाने के लिए ट्रैक्टर से पंपिंग सेट चलाकर पानी निकाला।
क्षति का ब्योरा
माछीझील गांव के किसान शिवदत्त सिंह ने बताया कि उनकी 22 बीघा धान की फसल डूब गई है। उन्होंने कहा कि पहले खेतों से पानी निकालना होगा, तभी कटाई हो सकेगी। अटसू क्षेत्र के सांफर गांव में करीब पांच एकड़ धान की तैयार फसल जमीन पर बिछ गई है।
सांफर के किसानों में नवनीत तिवारी भी शामिल हैं। नवनीत तिवारी ने बताया कि उन्होंने गांव के ही आदित्य त्रिपाठी की पांच एकड़ जमीन एक वर्ष के लिए नकद पर ली थी, अब मौसम की मार से बड़ा घाटा हो गया है।
बुधवार को शामपुर निवासी किसान रामवीर यादव ने कहा, “पानी जल्द न निकला तो धान सड़ जाएगा।” कई किसान पंपसेट और ट्रैक्टर से पानी निकालने का काम कर रहे हैं, लेकिन अधिक स्थानों पर जलभराव अधिक है और निकासी में समय लग रहा है।
प्रशासन और अगले कदम
किसानों का कहना है कि प्रशासन से मुआवजा देकर कुछ हद तक राहत दिलाने की उम्मीद है। अभी तक मुआवजे या राहत कार्यक्रम की कोई आधिकारिक घोषणा रिपोर्ट में शामिल नहीं है। किसानों ने आगे की कार्रवाई के लिए प्रदेश व जिले सरकार से जल्द मदद की मांग रखी है।
स्थानीय किसान इलाके में पानी निकलने के बाद फसल की स्थिति का आंकलन करेंगे और उसके आधार पर कटाई या नष्ट कर देने के विकल्प पर निर्णय लिया जाएगा। प्रभावित किसान फिलहाल पंपिंग और निकासी पर निर्भर हैं।
स्रोत: अमर उजाला

