आज़मगढ़। उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने आजमगढ़ पुलिस को दो बच्चियों को सुरक्षित बचाने के लिए किए गए सुनियोजित ऑपरेशन और वारदात के बाद प्रभावित परिवारों को मिली मानवीय सहायता के लिए सराहना की है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने कठिन परिस्थितियों में धैर्य, साहस और कुशल फील्ड क्राफ्ट का परिचय दिया।
डीजीपी ने कहा, “यही उत्तर प्रदेश पुलिस की वास्तविक पहचान है।” उन्होंने आगे कहा, “पुलिस का दायित्व केवल अपराध पर नियंत्रण और नागरिकों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट की घड़ी में जरूरतमंदों के साथ खड़े रहना और उन्हें दोबारा सामान्य जीवन की ओर बढ़ने में सहयोग देना भी है।”
बैलिस्टिक रिपोर्ट और बचाव
पुलिस की पुष्टि के मुताबिक पोस्टमार्टम और बैलिस्टिक रिपोर्ट से पता चला कि पिता अरविंद सिंह की रिवॉल्वर से चली गोली ही 9 साल के शौर्य सिंह को लगी थी। घटना के वक्त देर रात घर के भीतर से गोली चलने की आवाज आई। एसएसपी आजमगढ़ डॉ. अनिल कुमार, एसओजी प्रभारी संजय सिंह और आरक्षी प्रदीप ने खतरा भांपकर दरवाजा तोड़ा और दोनों बच्चियों को सकुशल बाहर निकाला।
अरविंद ने पुलिस पर फायरिंग की तो जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने उसे ढेर कर दिया। शौर्य को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद घर में ताला लगा हुआ पाया गया।
घटना के नेतृत्व में एडीजी वाराणसी जोन नवीन अरोरा घटनास्थल पर मौजूद रहे और डीआईजी आजमगढ़ परिक्षेत्र सुनील कुमार सिंह ने लगातार समन्वय और निगरानी की।
पारिवारिक मदद और प्रशासनिक कदम
एसएसपी आजमगढ़ डॉ. अनिल कुमार ने प्रभावित बच्चियों के लिए अपना एक महीने का वेतन देने का संकल्प लिया है। जिलाधिकारी के साथ समन्वय कर जिले के सभी पुलिसकर्मी अपना एक दिन का वेतन बच्चियों के नाम एफडी के रूप में जमा कराएंगे। 11 वर्षीय बच्ची के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्श का भी प्रावधान किया जाएगा।
जिन लोगों की हत्या हुई उनमें महेंद्र पाठक और पंडित अखिलेश मिश्रा शामिल हैं। शासन की पात्र योजनाओं के तहत उनके परिवारों को सहायता दिलाने की कार्रवाई आरंभ कर दी गई है। मृतकों के परिजनों को राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत आर्थिक सहायता दिलाने की तैयारी चल रही है।
पुलिस ने शंभूपुर हत्याकांड की पृष्ठभूमि भी उजागर की है। 12 अक्तूबर 2018 को हुई हत्या के मामले में चार दोषियों को निचली अदालत से उम्रकैद हुई थी, बाद में हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर वे बाहर आए थे। परिवार के अनुसार जेल से बाहर आने के बाद आरोपियों की टिप्पणियां अरविंद और उसके परिवार के लिए परेशानी का सबब बनीं।
स्रोत: अमर उजाला
