आज़मगढ़। काव्यांगन काव्य मंच की ओर से शनिवार को हरवंशपुर स्थित एक विद्यालय में कवि गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में वरिष्ठ और युवा कवियों ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कर श्रोताओं को बांधे रखा।
गोष्ठी की अध्यक्षता जन्मेजय पाठक ने की और संचालन विजयेंद्र प्रताप करुण ने संभाला। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से हुई, जिसे जन्मेजय पाठक और अन्य वरिष्ठ कवि-साहित्यकारों ने पूरी किया।
प्रस्तुति और मुख्य रचनाएँ
काव्यांगन काव्य मंच के अध्यक्ष रतनेश राय रत्न ने मंच पर उपस्थित कवियों का स्वागत किया और अपनी रचना “यदि न होती कैकेयी तो राम बस इंसान हैं” सुनाकर श्रोताओं की वाहवाही बटोरी। इसके बाद रोशनी गोंड ने मां वीणापाणी की वंदना प्रस्तुत की।
विजयेंद्र श्रीवास्तव करुण ने “बस मुझे इतनी शिकायत है गला, जिंदगी भर जिंदगी से ना मिला” सुनाई तो संजय पांडेय सरस ने “अब तो ये मजहबी झगड़े कभी नहीं होंगे, प्यार का पाठ मगर सबको पढ़ाना होगा” पढ़कर श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया। संतोष पांडेय ने भी “दिलों से रूह तक सजदा रहा है, मरके इश्क यूं जिंदा रहा है” जैसी रचना पेश की और तालियाँ बटोरीं।
अन्य प्रस्तुतियों में सुरेंद्र सिंह चांस, सोहनलाल स्नेहिल, शैलेंद्र मोहन राय अटपट, दिनेश श्रीवास्तव दाहिर, ईश्वर चंद्र त्रिपाठी, मैकश आजमी, आदित्य आजमी, श्रेया पांडे और रोशनी गोंड शामिल रहे। सभी कवियों ने विविध भावनाओं और विषयों पर रचनाएँ प्रस्तुत कीं।
अध्यक्ष रत्नेश राय ने मंच के उद्देश्य पर भी प्रकाश डाला और कहा कि मंच नई प्रतिभाओं को साहित्यिक उत्थान के लिए प्रेरित करने को दृढ़ संकल्पित है। उपस्थित श्रोता और स्थानीय शिक्षक कार्यक्रम से संतुष्ट दिखे और कईयों ने आयोजन की सराहना की।
आगे के कार्यक्रमों में काव्यांगन काव्य मंच ने स्थानीय स्तर पर और कवि गोष्ठियों का संचालन करने का संकेत दिया है ताकि क्षेत्रीय साहित्यिक प्रतिभाओं को मिलने वाला मंच बढ़ सके।
स्रोत: अमर उजाला

