आज़मगढ़। उत्तर प्रदेश सरकार ने 3 अक्टूबर को मातृभूमि योजना शुरू की है। इसके तहत देश‑विदेश में रहने वाले लोग अपने पैतृक गांवों में सार्वजनिक उपयोग के विकास कार्य करा सकेंगे।
योजना का मुख्य उद्देश्य प्रवासी भारतीयों और अन्य दानदाताओं को उनकी मातृभूमि से जोड़ना बताया गया है। किसी भी प्रस्तावित परियोजना की कुल लागत का 60 प्रतिशत हिस्सा दानदाता को वहन करना होगा, जबकि शेष 40 प्रतिशत राज्य सरकार देगी। परियोजना पूरी होने पर दाता या उनके पूर्वजों के नाम पर शिलापट्ट लगाया जाएगा।
कौन‑कौन से काम कराए जा सकेंगे
मातृभूमि योजना में कई तरह के सार्वजनिक और सामाजिक विकास कार्य शामिल हैं। जिन कामों के लिए आवेदन किया जा सकता है उनमें ग्राम पंचायत या क्षेत्र पंचायत में बरात घर व सामुदायिक भवन बनवाना, स्कूल‑कॉलेज में स्मार्ट क्लास और अन्य सुविधाएँ लगवाना, ग्रामों में सीसी रोड और आरसीसी ड्रेन बनवाना शामिल हैं।
- ओपन जिम, व्यायामशाला और स्किल सेंटर की स्थापना
- प्राथमिक व उप स्वास्थ्य केन्द्रों के भवन का निर्माण
- विद्यार्थियों के लिए छात्रावास और चौराहों पर सीसीटीवी व्यवस्था
- पुस्तकालय और अंत्येष्टि स्थल का निर्माण
- वाटर कूलर, यात्री शेड और तालाब का सुंदरीकरण
- सोलर स्ट्रीट लाइट और एलईडी लाइट लगाना
योजना के माध्यम से गांवों में सार्वजनिक सुविधाओं का समग्र विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की बात कही गई है। विदेश में रहने वाले लोग भी पोर्टल https://mbhumi.upprd.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और अपने गांव के लिए विकास कार्य प्रस्तावित कर सकते हैं।
योजना के फायदे तथा तकनीकी विवरणों के बारे में जानकारी देते हुए डीपीआरओ ने कहा, “पात्र दानदाताओं को आयकर अधिनियम के तहत कर छूट का लाभ भी प्रदान किया जाएगा।” -कुमार अमरेंद्र, डीपीआरओ।
आवेदन करने वाले दानदाताओं को स्थानीय ग्राम पंचायत या क्षेत्र पंचायत से समन्वय करना होगा। आगे की प्रक्रिया में जिन परियोजनाओं को स्वीकृति मिलेगी, उनके निर्माण और निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित विभागों को दी जाएगी।
स्रोत: अमर उजाला

