आज़मगढ़। शहर की मारवाड़ी धर्मशाला में सोमवार को एक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें शहर के कारोबारियों और व्यापारियों ने यूपीआई के नए शुल्क ढांचे पर अपनी आपत्तियां जताईं। कार्यक्रम में डिजिटल भुगतान के फायदे स्वीकार किए गए, लेकिन मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर को लेकर असंतोष दिखाई दिया।
व्यापार मंडल अध्यक्ष मनोज खेतान ने कहा कि सरकार की ओर से व्यापारियों के लिए ‘मर्चेंट’ शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यूपीआई मॉडल को दुनिया में अपनाया गया है, ऐसे में व्यापारियों पर अतिरिक्त भुगतान का प्रावधान उनकी चिंता बढ़ा रहा है।
व्यापारी क्या कहते हैं
युवा व्यापार मंडल अध्यक्ष परितोष रुंगटा ने एमडीआर को व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ बताया। उन्होंने कहा कि खुदरा कारोबार पहले से ही ई-कॉमर्स कंपनियों की प्रतिस्पर्धा से प्रभावित है और डिजिटल भुगतान से जुड़ा अतिरिक्त खर्च कारोबारियों की परेशानी बढ़ा सकता है।
सौरभ डालमियां ने बताया कि छोटे-बड़े सभी कारोबारों में यूपीआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है और ग्राहक नकद के बजाय डिजिटल भुगतान को प्राथमिकता दे रहे हैं। उनका कहना था कि भुगतान व्यवस्था से जुड़ा कोई भी खर्च सीधे कारोबारी के मार्जिन को प्रभावित करेगा। ओमप्रकाश अग्रवाल ने कहा कि इस तरह के बदलावों से पहले कारोबारी संगठनों के साथ पर्याप्त चर्चा होनी चाहिए।
केंद्र सरकार की ओर से बताया गया है कि 2,000 रुपये तक के व्यापारी भुगतान पर एमडीआर नहीं लगेगा और छोटे व्यापारियों के लिए शून्य एमडीआर की व्यवस्था जारी रहेगी। सरकार का कहना है कि करीब 96 प्रतिशत व्यापारी लेनदेन इससे प्रभावित नहीं होंगे और 2,000 रुपये से अधिक के निर्धारित व्यापारी लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा। सरकार ने यह भी कहा कि एमडीआर ग्राहक से वसूल किया जाने वाला कर नहीं है।
व्यापारी वर्ग ने कहा कि वे डिजिटल भुगतान व्यवस्था के पक्ष में हैं, पर शुल्क संबंधी प्रावधानों पर आपत्तियां और सुझाव सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि नियमन लागू करने से पहले स्थानीय व्यापार संगठनों से विचार-विमर्श किया जाए ताकि जमीनी समस्याएं सामने आ सकें।
संवाद कार्यक्रम में अमृत अग्रवाल, संतोष गोलवारा, पवन अग्रवाल, गिरिराज सिंघल, ओमप्रकाश अग्रवाल, रमेश अग्रवाल और संजय सिंह आदि व्यापारियों ने हिस्सा लिया और अपनी चिंताएं साझा कीं। आगे वे अपने सुझाव प्रदेश या केंद्र स्तर पर भेजने की तैयारी कर रहे हैं।
स्रोत: अमर उजाला

