बागपत। जिले के जिला‑उद्योग‑प्रोत्साहन‑केंद्र के कार्यालय में एक जिला‑एक‑उत्पाद योजना के तहत सिलाई मशीन प्रशिक्षण के इंटरव्यू आयोजित किए गए। इंटरव्यू में आए लोगों की लाइन में दो युवतियां भी खड़ी थीं जो दोनों एक साथ नंबर का इंतजार कर रही थीं।
जब दोनों की बारी आई तो उन्होंने उपायुक्त राजेंद्र कुमार को देखकर नमस्ते कहा। सूची में दोनों के पिता का नाम देखकर उपायुक्त ने ही बात छेड़ दी और कहा कि दोनों सगी बहनें हैं ना। तब एक युवती ने तपाक से जवाब दिया, “नहीं साहब…यह मेरे पड़ोसी ताऊ की लड़की है।”
एक‑घर‑से‑एक का नियम
उपायुक्त ने उपस्थित उम्मीदवारों को स्पष्ट कर दिया कि योजना के तहत एक घर से मात्र एक ही लाभार्थी का चयन होगा। उन्होंने दोनों बहनों से कहा कि आप दोनों आपस में तय कर लें कि किसे सिलाई मशीन चाहिए। इस नियम का मकसद अधिक परिवारों तक लाभ पहुंचाना बताया गया।
इंटरव्यू के दौरान बड़ौत की 62 साल की अनीसा भी आईं और उसने अपने अनुभव के बारे में बताया। अनीसा ने कहा, “15 साल से सिलाई कर रही हूं” और कहा, “यकीन नहीं है तो अभी मशीन चलवाकर देख लीजिए।” उसकी बातों और हौंसले ने वहां मौजूद अधिकारियों और अन्य आवेदकों का ध्यान खींचा।
कुछ उम्मीदवारों ने कहा कि परिवार में रोजगार के सीमित अवसर हैं और सिलाई मशीन मिल जाने से आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। अधिकारियों ने बताया कि आवेदन‑प्रक्रिया पारदर्शी होगी और पात्रता के अनुरूप ही चयन किया जाएगा।
आगे क्या होगा
अब अधिकारियों द्वारा आवेदन जांच और पात्रता की पुष्टि के बाद अंतिम सूची जारी की जाएगी। जिन उम्मीदवारों का चयन होगा उन्हें प्रशिक्षण और मशीन देने की प्रक्रिया के बारे में अलग से सूचना मिलेगी। लाभार्थी चाहें तो आगे के प्रशिक्षण सत्रों और सलाह के लिए जिला‑उद्योग‑प्रोत्साहन‑केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।
स्रोत: दैनिक जागरण

