लखनऊ। दोपहिया वाहन यानी बाइक रोजमर्रा के काम और दफ्तर के लिए कई घरों में इस्तेमाल होती है। बाइक की उम्र बढ़ाने और प्रदर्शन बनाए रखने के लिए समय-समय पर सर्विसिंग करवाना जरूरी है।
कई बाइक मालिकों के मन में यह सवाल रहता है कि कितने किलोमीटर चलने के बाद बाइक को मैकेनिक के पास ले जाना चाहिए। इससे इंजन की सेहत बनी रहती है और अचानक टूट-फूट की संभावना कम होती है।
कौन‑कौन सी चीजें चेक होती हैं
सर्विसिंग के दौरान कुछ बुनियादी हिस्सों की जाँच अनिवार्य होती है। इनमें इंजन ऑयल, एयर फिल्टर और स्पार्क प्लग की जांच शामिल है। सही समय पर ऑयल बदलना इंजन को चिकनाई देता है और घर्षण कम करता है। हवा फिल्टर को साफ या बदला तो इंजन को सही हवा मिलती है, जिससे ईंधन की बचत होती है। स्पार्क प्लग की स्थिति जाँचें, क्योंकि खराब स्पार्क प्लग से इंजन मिसफायर कर सकता है।
इसके अलावा ब्रेक पैड, टायर प्रेशर और चेन‑टेंशन भी टेक्नीशियन चेक करते हैं। छोटे‑छोटे हिस्सों की नियमित जाँच से लंबी अवधि में महंगे मरम्मत खर्चों से बचा जा सकता है।
आम तौर पर निर्माता की सर्विस मैन्युअल में तय अंतराल के अनुसार सर्विस करवाई जाती है। लेकिन सड़क की हालत, बाइक का इस्तेमाल और ड्राइविंग स्टाइल के आधार पर यह अंतराल कम या ज्यादा हो सकता है। विशेष रूप से धूल भरे इलाकों में एयर फिल्टर जल्दी गंदा होता है और ज़्यादा अक्सर सफाई या बदलने की जरूरत पड़ती है।
बाइक मालिकों को चाहिए कि वे सर्विसिंग के लिए अपने वाहन की मेन्युअल निर्देश पुस्तिका देखें और किसी भरोसेमंद सर्विस सेंटर पर ही काम कराएँ। समय पर सर्विस कराने से बाइक की परफॉर्मेंस बनी रहती है और अनावश्यक खर्चों से बचाव होता है।
स्रोत: अमर उजाला

