नई दिल्ली। एशियन गेम्स में भारतीय महिला हॉकी टीम ने चीन को हराकर स्वर्ण पदक जीता। फाइनल मुकाबला 2 अक्तूबर को हुआ जिसमें भारत ने 1-0 से जीत दर्ज की।
मैच का फैसला
मैच के शुरुआती मिनटों से ही भारतीय टीम ने दबाव बनाया। लालरेमसियामी ने दसवें मिनट में मैदान का गोल दागकर भारत को बढ़त दिलाई। यह लालरेमसियामी का 200वां अंतरराष्ट्रीय मैच था और उनका यह एकमात्र गोल निर्णायक बना।
पहले क्वार्टर में भारत के बलजीत कौर को छठे मिनट में ग्रीन कार्ड मिला। भारत को पेनल्टी कॉर्नर भी मिला लेकिन वह गोल में बदल नहीं सका। हाफ टाइम तक स्कोर 1-0 रहा जबकि 28वें मिनट में चीन के वेन डान को ग्रीन कार्ड दिखाया गया।
दूसरे क्वार्टर में चीन ज़्यादा आक्रमक दिखा और उसे पेनल्टी स्ट्रोक भी मिला। लेकिन भारतीय गोलकीपर सविता पूनिया ने दमदार बचाव कर चीन को बराबरी से रोका। भारतीय डिफेंस ने लगातार प्रयासों को नाकाम किया और टीम ने बढ़त संभाल कर रखी।
चीन ने अंत में रणनीति बदलकर गोलकीपर को बाहर बैठा दिया और एक अतिरिक्त खिलाड़ी उतारा, पर यह चाल सफल नहीं हुई। अंतिम सीटी के साथ भारतीय खेमा खुशी से झूम उठा क्योंकि 44 साल बाद एशियाड का स्वर्ण लौटाया गया।
भारत और चीन के बीच कुल 29 मुकाबले हुए हैं; इनमें से चीन ने 12 और भारत ने 12 जीते हैं जबकि पांच मैच ड्रॉ रहे। इस बार सलीमा टेटे की अगुआई वाली टीम पूरे टूर्नामेंट में अजेय रही।
टीम और आगे की राह
भारत की शुरुआत की प्लेइंग-11 में बिच्छु देवी खारीमबम (गोलकीपर), सलिमा टेटे (कप्तान), नवनीत कौर, निक्की प्रधान, दीपिका, लालरेमसियामी, नेहा, ज्योति, सुशीला चानू, इशिका चौधरी और सुनेलिता टोपो शामिल थीं। सब्स्टीट्यूट में शिल्पी दास, सविता (गोलकीपर), इशिका, साक्षी राणा, ऋतुजा डाडासो, पिसल लाथांलुआंगी और बलजीत कौर थे।
मैच शुरू होने में एक घंटे की देरी भी हुई क्योंकि टीम बसें रास्ते में ट्रैफिक में फंस गईं; निर्धारित समय दोपहर 3:30 बजे था लेकिन खेल 4:30 बजे शुरू हुआ। अब टीम ने लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर लिया है और अगले लक्ष्य ओलंपिक में बेहतर प्रदर्शन होगा।
स्रोत: अमर उजाला

