एटा। शनिवार को उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के आह्वान पर जिलेभर के लेखपालों ने संपूर्ण समाधान दिवस का बहिष्कार किया और तहसील सदर परिसर में धरना देकर शासन के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। धरने का नेतृत्व तहसील अध्यक्ष भुवनेंद्र ने किया।
धरने में लेखपालों ने अपनी आठ सूत्रीय मांगें रखीं और मांगों के जल्द निस्तारण की मांग करते हुए चेतावनी दी कि कार्रवाई न हुई तो आंदोलन तेज करेंगे। धरने के बाद लेखपालों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन अधिकारियों को सौंपा।
मुख्य मांगे और नाराजगी
संघ ने प्रमुख मांगों में 2800 रुपये ग्रेड पे करने, वेतन विसंगति दूर करने और अंतर मंडलीय स्थानांतरण की व्यवस्था लागू करने को रखा है। लेखपालों ने बताया कि पदोन्नति के बाद समय पर डीपीसी (डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी) नहीं होने पर भी वे खफा हैं और इसके तुरंत संचालन की मांग की जा रही है।
इसके अलावा लेखपालों ने ग्राम सचिवालयों में काम के दौरान जरूरी सुविधाएं और सुरक्षा उपलब्ध कराने की बात कही। उन्होंने लेखपाल पद को तकनीकी पद घोषित करने और लैपटॉप, मोबाइल सहित अन्य तकनीकी संसाधन मुहैया कराने की भी मांग रखी।
संघ पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ये मांगे जिलेभर के लेखपालों की लंबे समय से लंबित शिकायतों का हिस्सा हैं। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि मांगों का तात्कालिक समाधान नहीं निकला तो संघ विशेष कदम उठाएगा।
अधिकारियों को सौंपे गए ज्ञापन में सभी आठ बिंदुओं का लिखित विवरण रखा गया है। संघ ने कहा है कि यदि इन मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो 24 अक्तूबर से जिले में जिला स्तर पर धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
स्थानीय लोगों और ग्राम सचिवालय में काम करने वाले कर्मचारियों ने कहा कि आवश्यक संसाधन व सुरक्षा मिलने पर काम में सहजता आएगी। प्रशासन की ओर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
स्रोत: अमर उजाला

