हापुड़। नवीन मंडी में शनिवार को गन्ना समिति की वार्षिक सामान्य निकाय की बैठक में क्रय केंद्रों से जुड़े प्रस्तावों को लेकर किसानों और समिति के बीच तनाव पैदा हो गया। किसानों का कहना था कि उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त मौका नहीं मिला और बैठक समाप्त होने पर चेयरमैन मंच छोड़कर चले गए।
किसानों के विरोध के बाद हंगामा बढ़ा। मौके पर पहुंचे सदस्यों और किसान नेताओं की समझाइश पर चेयरमैन कुणाल चौधरी वापस आए और किसानों की बातें सुनीं। भाकियू टिकैत के एनसीआर अध्यक्ष (युवा) एकलव्य सिंह सहारा भी वार्ता के लिए मौजूद रहे।
मांगें और प्रस्ताव
किसान नेता चौधरी विनय बाना ने बताया कि बैठक में क्रय केंद्रों और व्यवस्थाओं को लेकर असंतोष जताया गया। उन्होंने कहा कि गन्ना समिति का कार्यालय किसानों का है और उनकी समस्याओं को सुने बिना व्यवस्था नहीं चल सकती। किसानों ने तालाबंदी जैसे कदम उठाने की चेतावनी भी दी।
बैठक में समय से गन्ना मूल्य भुगतान सुनिश्चित करने की प्रमुख मांग उठी। प्रस्ताव रखा गया कि पेराई सत्र 2026-27 में समय पर भुगतान न करने वाली चीनी मिलों के क्षेत्र काटकर ऐसे क्रय केंद्रों को उन मिलों को आवंटित किया जाए जो 14 दिन के भीतर भुगतान करें। साथ ही 500 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य घोषित करने की मांग शामिल थी।
सभापति और चेयरमैन कुणाल चौधरी ने सिंभावली व ब्रजनाथपुर चीनी मिलों को पेराई सत्र 2025-26 के बकाया 15 प्रतिशत ब्याज सहित भुगतान का निर्देश देने का दावा भी किया। बैठक में भूमि विकास बैंक के चेयरमैन रायसिंह और चीनी मिलों के प्रतिनिधि मौजूद थे।
किसानों की बकाया गन्ना भुगतान समस्या पर चर्चा जारी रही। बैठक के आयोजकों ने कहा कि 15 अक्तूबर तक किसानों को कुल 100 करोड़ का भुगतान किया जाएगा और दोनों चीनी मिलों के बिक्री से जुड़े मामले का समाधान जल्द किया जाएगा।
“बैठक या इसके बाहर कोई हंगामा नहीं हुआ है। सभी किसानों की बकाया गन्ना भुगतान की समस्या है। आगामी 15 अक्तूबर तक किसानों को 100 करोड़ का भुगतान होगा। दोनों चीनी मिलें बिक चुकी हैं, इसका समाधान भी जल्द होने वाला है।” – कुणाल चौधरी, चेयरमैन, गन्ना समिति
स्रोत: अमर उजाला

