इटावा। चकरनगर इलाके में स्थित चंबल पुल आत्महत्या के मामलों को लेकर लगातार चर्चा में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल पर अब तक बड़ी संख्या में लोग नदी में छलांग लगा चुके हैं और सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं हैं।
स्थानीयों की मांग है कि पुल पर करीब 10 फीट ऊंची लोहे की जाली लगाई जाए ताकि लोग नदी में छलांग न लगा सकें। लोगों के मुताबिक यहां लगभग हर माह आत्महत्या की कोई न कोई घटना सामने आती है और घटना के बाद पुलिस व प्रशासन कई दिनों तक शव की तलाश में लगे रहते हैं।
तलाश में दिक्कतें और खर्च
तलाश के दौरान सबसे बड़ी समस्या मोटरबोट के लिए पेट्रोल की उपलब्धता बतायी जाती है। स्थानीय बताते हैं कि शव खोजने के लिए मोटरबोट व व्यवस्था न होने से बरामदगी में देरी होती है और एक खोजबीन पर करीब आठ से दस हजार रुपये तक खर्च हो जाते हैं। तेज बहाव और मगरमच्छों की मौजूदगी खोज को और मुश्किल बना देती है।
- केस-1: 13 सितंबर को सहसों थाना क्षेत्र के बलजुपुरा निवासी शेर सिंह (45) ने पत्नी से विवाद के बाद चंबल पुल से छलांग लगा दी; तीन दिन खोज के बाद भी शव नहीं मिला।
- केस-2: 29 अगस्त को मध्य प्रदेश के भिंड के रौन थाना क्षेत्र के लारोल गांव के जितेंद्र उर्फ डंपी (50) ने छलांग लगाई; सेंचुरी की मोटरबोट से खोजबीन के बाद भी कोई सुराग नहीं मिला।
- केस-3: 15 दिसंबर 2024 को प्रेमपुरा गांव के राम कली (50) ने पुल से छलांग लगाकर जान दे दी।
- केस-4: 9 नवम्बर 2024 को ददरा निवासी मोहन (20) को राहगीरों ने गिरते देखा; सेंचुरी के नाविक और पुलिस ने रेस्क्यू कर निकाल लिया।
परिवारों को शव न मिलने से आर्थिक सहायता और मृत्यु प्रमाण पत्र में दिक्कतें भी आ रही हैं। शव न मिलने पर परिजन सरकार की राहत नहीं पा पाते और प्रमाणपत्र के लिए परेशान होते हैं।
प्रशासन क्या कर रहा है
एसडीएम रोहित कुमार मौर्य ने कहा, “चंबल पुल से लोगों के कूदने की घटनाएं बढ़ी हैं। रेलिंग के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा। इस संबंध में वह पीडब्ल्यूडी से भी बात करेंगे।” प्रशासन ने रेलिंग व सुरक्षा के विकल्पों पर विचार शुरू कर दिया है, पर अभी तक कोई ठोस काम नजर नहीं आया।
स्थानीय लोग जल्द उपाय लागू करने की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में और जीवन खतरे से बच सकें। प्रशासन की जल्द कार्रवाई पर ही आगे की खोज-बीन और सुरक्षा व्यवस्था बेहतर हो सकेगी।
स्रोत: अमर उजाला

