Kanpur News : शिक्षक भर्ती घोटाले में पिता-पुत्र गिरफ्तार, नेपाल भागने की फिराक में थे...

शिक्षक भर्ती घोटाले में पिता-पुत्र गिरफ्तार, नेपाल भागने की फिराक में थे...
UPT | प्रतीकात्मक फोटो

Jun 11, 2024 03:33

आजकल हर कोई बिना मेहनत किए ज्यादा पैसा कमाना चाहता है। अब कानपुर में फर्जी शिक्षक भर्ती का मामला सामने आया है। कानपुर में शिक्षक भर्ती घोटाले में फरार चल रहे पिता-पुत्र को गिरफ्तार कर लिया गया...

Jun 11, 2024 03:33

Kanpur News : आजकल हर कोई बिना मेहनत किए ज्यादा पैसा कमाना चाहता है। अब कानपुर में फर्जी शिक्षक भर्ती का मामला सामने आया है। कानपुर में शिक्षक भर्ती घोटाले में फरार चल रहे पिता-पुत्र को गिरफ्तार कर लिया गया है। दोनों लंबे समय से पुलिस को चकमा दे रहे थे। अंतरराज्यीय गिरोह के मास्टरमाइंड पिता-पुत्र को एसआईटी (विशेष जांच दल) ने वाराणसी और महाराजगंज से गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी पिता-पुत्र को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है।

लेन-देन का जिम्मा बेटे पर
पिता हरेंद्र पांडेय चित्रकूट इंटर कॉलेज, वाराणसी में गणित के शिक्षक थे। वह अभ्यर्थियों की तलाश कर उनसे सेटिंग करते थे। बेटा प्रकाश पांडेय महात्मा गांधी इंटर कॉलेज, महाराजगंज में लेक्चरर है। लेन-देन का काम प्रकाश पांडेय देखता था। पैसा उसके खाते में आता था। दोनों से पूछताछ में एक रिटायर्ड डीआईओएस (डिस्ट्रिक्ट इंस्पेक्टर ऑफ स्कूल) और डीआईओएस कार्यालय कानपुर के दो अफसरों के नाम सामने आए हैं।

डीसीपी ने पूरी प्रक्रिया बताई
डीसीपी ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि कर्नलगंज थाने की पुलिस ने वाराणसी के जैतपुरा निवासी हरेंद्र पांडेय और उसके बेटे प्रकाश पांडेय को गिरफ्तार किया है। हरेंद्र पांडेय और पूर्व में जेल भेजे जा चुके लालजी के बीच 30 साल से संबंध थे। लालजी माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में क्लर्क था। हरेंद्र का बोर्ड में काम था, जिसके चलते दोनों संपर्क में आए। पूर्व में जेल भेजे जा चुके मिर्जापुर के दिनेश कुमार पांडेय और अभिनव त्रिपाठी डीआईओएस से जुड़े काम देखते थे। हरेंद्र अभ्यर्थियों को ढूंढ़ने और फिर उनकी नियुक्ति कराने की व्यवस्था करता था। वह बेटे प्रकाश के बैंक खाते में पैसे भी जमा कराता था। इसके बाद प्रकाश पूरा लेन-देन संभालता था। नौ शिक्षकों की भर्ती में पांच हरेंद्र के संपर्क में थे, जबकि चार दिनेश और अभिनव के संपर्क में थे। 

इन बड़े अफसरों के नाम सामने आए 
फर्जी शिक्षक भर्ती घोटाले में गिरफ्तार पिता-पुत्र से पूछताछ में कानपुर में तैनात एक डीआईओएस और एक रिटायर्ड अफसरों समेत कई कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं। हरेंद्र ने बताया कि इस मामले में जेल भेजा गया दिनेश उसका साला है, जबकि अभिनव दिनेश का दोस्त है। दिनेश और अभिनव कानपुर में तैनात रिटायर्ड डीआईओएस और रिटायर्ड अफसर को जानते थे। यह डीआईओएस और रिटायर्ड बाबू मिर्जापुर में बीएसए और डायट में तैनात थे, तभी से दोनों एक-दूसरे को जानते थे। इसी के चलते पहले दिनेश और अभिनव ने लालजी के जरिए शिक्षक सेवा चयन बोर्ड से डील की और एडी माध्यमिक की फर्जी आईडी से मेल भेजा। फिर पूर्व डीआईओएस और अफसर के जरिए बिना सत्यापन के ही शिक्षकों का पैनल स्कूलों में भेज दिया।

एक ही पद पर दो शिक्षिकाएं नियुक्त
रिक्षा पांडेय ने बताया कि जिस पद पर उनकी नियुक्ति हुई, उस पद पर पहले से ही प्रधानाध्यापिका रेखा कार्यरत थीं। जब रेखा को पता चला कि रिक्षा की नियुक्ति उनके कार्यकाल में हुई है, तो उन्हें शक हुआ। उन्होंने नियुक्ति का सत्यापन कराने के लिए एडी माध्यमिक शिक्षा को पत्र भेजा। बताया जाता है कि पहले तो अफसरों ने मामला शांत करा दिया, लेकिन रेखा ने दोबारा रिक्षा की नियुक्ति के सत्यापन को लेकर बोर्ड और विभाग के अन्य अफसरों को पत्र लिखा। इसके बाद एडी ने जांच कराई तो फर्जीवाड़ा सामने आया। फरवरी 2024 में कमेटी गठित की गई। जांच के दौरान मौजूदा डीआईओएस अरुण कुमार की तहरीर पर अरविंद सिंह यादव, स्वाति द्विवेदी, आशीष कुमार पांडेय समेत नौ लोगों के खिलाफ कर्नलगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।

अधिक पैसे कमाने के लालच में किया यह काम
पुलिस हिरासत में आरोपी ने बताया कि अधिक पैसे कमाने के लालच में उसने यह सब किया। उसने बताया कि उसकी नियुक्ति माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में हुई थी। लाल जी सिंह मिर्जापुर स्कूल में मैनेजर दिनेश पांडेय और केबीपीजी कॉलेज में लैब टेक्नीशियन अभिनव त्रिपाठी और मैंने मिलकर लेक्चरर की फर्जी भर्ती की साजिश रची थी। हमने पैनल बनाया और उसके बाद इस काम को अंजाम दिया गया।

नेपाल भागने की फिराक में थे पिता-पुत्र
मास्टरमाइंड पिता-पुत्र भारत छोड़कर नेपाल भागने की फिराक में थे। सूत्रों के अनुसार, वाराणसी के प्रकाश अपने परिवार के साथ महराजगंज से गोरखपुर पहुंचे थे। यहां पिता हरेंद्र भी आए थे। दोनों गोरखपुर के एक होटल में ठहरे थे। इसी दौरान पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। पिता-पुत्र की गिरफ्तारी के विरोध में प्रकाश की पत्नी और परिवार के लोगों ने हंगामा किया। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद प्रकाश के मोबाइल पर एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने पूछा, नेपाल पहुंच गए हो? इस पर टीम में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि दोनों नेपाल नहीं, बल्कि कानपुर के लिए निकले हैं।

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