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ललितपुर: स्थायी लोक अदालत ने सुभाष जायसवाल पर लगे आरोप खारिज किए

अदालत ने कहा कि याचिका प्रमाणित नहीं थी; आरोप सीसी सड़क निर्माण में गुणवत्ता की कमी और नाली-पुलिया हटाने से जुड़े थे।

ललितपुर: स्थायी लोक अदालत ने सुभाष जायसवाल पर लगे आरोप खारिज किए
फोटो: अमर उजाला

ललितपुर। स्थायी लोक अदालत ने तत्कालीन नगर पालिकाध्यक्ष सुभाष जायसवाल पर लगे आरोपों को खारिज कर दिया है। मामले की सुनवाई कोर्ट में पूरी हुई और याचिका पर फैसला सुनाया गया।

अदालत में दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि जायसवाल के कार्यकाल में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कार्यालय के सामने नाली व पुलिया मिटाकर सीसी सड़क बनाई गई। याचिका में यह भी कहा गया कि इस काम में गुणवत्ता और पारदर्शिता नहीं रखी गई तथा सरकारी धन का दुरुपयोग कर गबन किया गया।

याचिका और कानूनी आधार

अधिवक्ता भगवत प्रसाद पाठक ने यह प्रार्थना पत्र विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 की धारा 22ए (बी)(4) के तहत दायर किया था। उन्होंने तत्कालीन नगर पालिकाध्यक्ष को नोटिस भी दिया था और आरोपों का प्रमाण देने की मांग की थी। अदालत ने याचिका की सभी दलीलों पर सुनवाई की।

अदालत ने पाया कि प्रस्तुत याचिका प्रमाणित नहीं है और इसमें बताए गए तथ्यों को याचिकाकर्ता ने न्यायालय में साबित नहीं किया। पीठ ने फैसला देते हुए कहा कि केवल यह बताना कि सड़क निर्माण अध्यक्ष के कार्यकाल में हुआ, इससे व्यक्तिगत देयता स्थापित नहीं होती। साथ ही नाली के निर्माण का मूल स्वीकृत योजना में होना या न होना भी प्रार्थी द्वारा प्रमाणित नहीं किया गया।

फैसला आते ही केस खत्म माना गया और आरोप खारिज कर दिए गए। अदालत का आदेश इससे संबंधित आगे की कानूनी कार्रवाई पर प्रभाव डालेगा और याचिकाकर्ता को नए साक्ष्य पेश करने पर ही राहत मिल सकती है।

स्थानीय लोग और नगर पालिका के कर्मचारी अब फैसला पढ़ रहे हैं और स्थिति पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। जो भी पक्ष आगे कानूनी कदम उठाना चाहेगा वह अदालत के निर्देशों के अनुसार नई याचिका या अपील दर्ज कर सकता है।

स्रोत: अमर उजाला

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Vikas Kumar

Vikas Kumar

कई वर्षों से समाचार, योजना, रोजगार इत्यादि मामलों से जुड़े कार्यों में संलग्न।