अवधेश कुमार वर्मा ने कहा प्रदेश की बिजली कंपनियों पर प्रदेश के उपभोक्ताओं का पहले से ही 33122 करोड सरप्लस निकल रहा है। इस वर्ष 2024-25 में भी उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर लगभग 1944 करोड़ सरप्लस निकला है। ऐसे में बिजली दरों में कमी के लिए उपभोक्ता परिषद उत्तर प्रदेश सरकार का साथ मांगेगा।
उपभोक्ता परिषद ने लाइन हानि पर उठाए सवाल : नियामक आयोग के फैसले पर अगले सप्ताह दाखिल करेगा पुनर्विचार याचिका
Oct 11, 2024 17:29
Oct 11, 2024 17:29
- लाइन लॉस का प्रतिशत बढ़ने से उपभोक्ताओं का नुकसान
- वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए 13.09 प्रतिशत लाइन हानि को लेकर मंजूरी पर उठाए सवाल
- उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर 1944 करोड़ सरप्लस
टैरिफ आदेश का बारीकी से अध्ययन
उपभोक्ता परिषद ने टैरिफ आदेश का अध्ययन करना शुरू कर दिया है। संगठन के अध्यक्ष और राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने शुक्रवार को बताया कि अगले हफ्ते बिजली दरों में कमी करने के लिए पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाएगी। उन्होंने कहा उपभोक्ता परिषद की 90 प्रतिशत मांगों को नियामक आयोग ने मान लिया है, उसके लिए आभार है। लेकिन, जिन मांगों को नहीं माना गया है, उसके लिए अब आगे संघर्ष किया जाएगा।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने की ऊर्जा मंत्री एके शर्मा से मुलाकात
अवधेश कुमार वर्मा ने शुक्रवार को इसी कड़ी में प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा से उनके आवास पर मुलाकात की। उन्होंने प्रदेश के उपभोक्ताओं की ओर से टेरिफ दरें नहीं बढ़ाए जाने पर आभार प्रकट किया और कहा कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है जो पांच वर्षों से अपनी बिजली दरों को यथावत रखे हैं उपभोक्ता परिषद ने ऐतिहासिक निर्णय के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी आभार जताया। वहीं प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं के हितों में और भी फैसले करने की अपील की।
उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर इस वर्ष 1944 करोड़ सरप्लस
अवधेश कुमार वर्मा ने कहा प्रदेश की बिजली कंपनियों पर प्रदेश के उपभोक्ताओं का पहले से ही 33122 करोड सरप्लस निकल रहा है। इस वर्ष 2024-25 में भी उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर लगभग 1944 करोड़ सरप्लस निकला है। ऐसे में बिजली दरों में कमी के लिए उपभोक्ता परिषद उत्तर प्रदेश सरकार का साथ मांगेगा। संगठन बहुत जल्दी मुख्यमंत्री से भी मुलाकात कर बिजली दरों में कमी के मुद्दे पर सहयोग की अपील करेगा, जिससे रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत बिजली दरों में कमी का रास्ता साफ हो सके।
सरकार को साथ लेकर अभियान चलाने की रणनीति
उपभोक्ता परिषद ने अपनी रणनीति में इस बात पर जोर दिया कि बिजली दरों में कमी के लिए जब तक प्रदेश सरकार का खुल के साथ नहीं मिलेगा, बिजली कंपनियां उसमें अड़ंगा डालते रहेंगी। इसलिए उत्तर प्रदेश सरकार को साथ लेकर इस अभियान को आगे चलाया जाएगा।
लाइन हानि का प्रतिशत बढ़ाने से उपभोक्ताओं को नुकसान
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा जब प्रदेश की बिजली कंपनियों की वितरण हानियों को विद्युत नियामक आयोग ने पहले ही 10.67 प्रतिशत पर मंजूरी दी थी तो अब वर्ष 2024-25 के लिए 13.09 प्रतिशत कैसे मंजूर कर दिया। ऐसे में सवाल उठता है कि विद्युत नियामक आयोग क्या बिजली कंपनियों की गलतियों का खामियाजा उपभोक्ताओं पर डालना चाहता है। बिजनेस प्लान में जब लाइन हानियों को पहले ही विद्युत नियामक आयोग ने तय कर दिया है, तो उसी आधार पर आगे चलना चाहिए। इस प्रकार से वितरण हानियों को बढ़ाकर तय करने से प्रदेश की विद्युत उपभोक्ताओं का लगभग 2000 करोड़ रुपये सरप्लस में नहीं निकल पाया यानी कि नुकसान हुआ। विद्युत नियामक आयोग में जब पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाएगी उसमें इस मुद्दे को भी आधार बनाया जाएगा।
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