मैनपुरी। जिले में रेबीज का खतरा बढ़ता जा रहा है और कुत्ते, बंदर व बिल्लियों के काटने से ज्यादा लोग घायल हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी से अब तक 8,200 लोगों को एंटी‑रेबीज का उपचार दिया जा चुका है।
आंकड़ों के अनुसार जिले में प्रतिमाह लगभग 900 लोगों को एंटी‑रेबीज का टीका लगाया जा रहा है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 300 से 400 लोग एंटी‑रेबीज के लिए पहुंचते हैं।
नौ महीने के हादसे
जिले में जनवरी से अब तक आने वाले नौ महीने में जानवरों के काटने के मामले रिपोर्ट हुए हैं। विभाग ने स्थिति का विभाजन भी जारी किया है:
- बंदरों के हमले से घायल: 5,430
- कुत्तों के हमले से घायल: 2,735
- बिल्लियों के हमले से घायल: 35
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. राज सिंह बताते हैं, “रेबीज की रोकथाम के लिए तो एंटी रेबीज है लेकिन रेबीज एक बार यदि किसी मनुष्य के शरीर में फैल गया तो उसका कोई उपचार नहीं होता है।” उनका कहना है कि शुरुआती उपचार और समय पर टीकाकरण बेहद जरूरी है।
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. गौरव पारिक बताते हैं, “रेबीज की बीमारी कुत्ते, बिल्ली, बंदर, चमगादड़, गाय-भैंस, चूहों, लोमड़ी, भेड़िया जैसे जानवरों के काटने से होती है। जिले में ज्यादातर रेबीज के मामले कुत्ते या बंदर के काटने के हैं।” वे बताते हैं कि यह वायरस लार के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है और वॉर्म‑ब्लडेड स्तनधारियों को प्रभावित करता है।
रेबीज के शुरुआती लक्षणों में बुखार, भूख न लगना, कमजोरी और चिड़चिड़ापन शामिल हैं। गंभीर मामलों में मरीज को कोमा भी आ सकता है।
रोकथाम और स्थानीय असर
बचाव के लिए चिकित्सक जख्म को साबुन और नल के बहते पानी से 10‑15 मिनट तक धोने, डिटॉल या आयोडीन से साफ करने और नजदीकी अस्पताल पर जाकर 20‑24 घंटे के भीतर वैक्सीनेशन कराने की सलाह दे रहे हैं। स्थानीय लोग चिंतित हैं और कई परिवार पालतू जानवरों से दूरी बना रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने समुदाय में जागरूकता बढ़ाने और समय पर टीकाकरण पर जोर दिया है।
स्रोत: अमर उजाला

