मैनपुरी। विश्व रेबीज दिवस पर स्वास्थ्य अधिकारियों ने जिले में जानवर के काटने के मामलों को लेकर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि रेबीज एक ज़ूनॉटिक वायरल बीमारी है और संक्रमित जानवर के काटने से फैलती है।
नेशनल रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम के नोडल अधिकारी डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति ने बताया कि 99 फीसदी रेबीज के मामले कुत्ते के काटने से होते हैं। जिले में बीते साल 1.80 लाख लोग कुत्ता, बंदर और बिल्ली सहित विभिन्न जानवरों के काटने से प्रभावित हुए। इस साल 27 सितंबर तक 1.32 लाख मरीज इलाज के लिए आ चुके हैं और इनमें से 2,661 मरीजों को हालत गंभीर होने पर सीरम दिया गया।
किसने कितने काटे
जिला अस्पताल के एंटी रेबीज वैक्सीन ओपीडी प्रभारी डॉ. मोहित बंसल ने बताया कि बीते साल कुल 3,619 मरीज अस्पताल में दाखिल हुए। इनमें से 2,390 को निराश्रित कुत्तों ने काटा जबकि 273 को पालतू कुत्तों ने काटा। 740 मामले बंदरों के काटने के थे और 183 मरीजों को बिल्ली ने काटा। बाकी मामले चूहे, सियार जैसी अन्य प्रजातियों के काटने के थे।
अधिकारियों ने काटे जाने के बाद फौरन क्या करना है, वह भी बताया। घाव को नल के नीचे साबुन से कम से कम 15 मिनट तक धोएं और घाव पर एंटीसेप्टिक अॉइंटमेंट लगाएं। तत्क्षण डॉक्टर को दिखाएं और 24 घंटे के भीतर एआरवी लगवाएं। पूरा डोज लेना जरूरी है।
रेबीज के शुरुआती लक्षण सामान्य दिखते हैं पर बीमारी तेजी से गंभीर रूप ले लेती है। शुरुआती संकेतों में जी मचलना, घबराहट, बुखार, सिरदर्द, बेचैनी और अनिद्रा शामिल हैं। बाद में हाइड्रोफोबिया, अत्यधिक लार गिरना और अचानक गुस्सा जैसे लक्षण दिखते हैं।
क्या करना चाहिए
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि किसी भी काटे जाने की घटना पर देरी न करें और न ही घरेलू उपचार पर निर्भर रहें क्योंकि इससे जीवन को खतरा हो सकता है। आवश्यक टीकाकरण और सीरम का निर्णय डॉक्टर करेंगे।
स्रोत: अमर उजाला

