मैनपुरी। मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत जिले के नौ चयनित मार्गों पर मई से बसें चलने का दावा किया गया था, लेकिन चार महीने बाद भी वह वादा जमीन पर नहीं उतर पाया है। ग्रामीण आज भी शहर, बाजार और अस्पताल जाने के लिए निजी वाहन या सीमित सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर हैं।
योजना में रजौरा-स्याहीपुरा-फतेहाबाद-आगरा, गोहरा-खेराराठौर-पिनाहट-आगरा, मलियाखेड़ा-चित्राहाट-बाह-आगरा, फतेहपुर सीकरी-कागारौल-अकोला-आगरा, मेवली-खेरागढ़-सैंया-आगरा, खेरिया-सैंया-ककुआ-आगरा, गढ़ी दर्याव-शमसाबाद-आगरा समेत कुल नौ मार्ग शामिल थे। हर विकासखंड में दो बसों के संचालन का प्रावधान था और नियम के अनुसार बसें अधिकतम आठ वर्ष पुरानी हो सकती थीं तथा डीजल, सीएनजी या इलेक्ट्रिक हो सकती हैं।
क्यों नहीं शुरू हो पाया संचालन
क्षेत्रीय प्रबंधक बीपी अग्रवाल ने बताया कि चयनित नौ मार्गों पर बस संचालन प्रस्तावित था, पर बसें खरीदी नहीं जा सकीं। उन्होंने कहा कि खरीद में देरी की वजह से सेवाएं शुरू नहीं हो पाईं। उन्होंने यह भी बताया कि बाह और फतेहाबाद रोड पर योजना के तहत ही बसों का संचालन फिलहाल चल रहा है।
ग्रामीणों ने कहा कि इस योजना से उन्हें सस्ता और सुविधाजनक सफर मिलने की उम्मीद थी। परन्तु चार महीने से इंतजार के बाद भी उन्हें स्कूल‑हॉस्पिटल और बाजार तक पहुँचने के लिए महंगे पब्लिक और निजी वाहनों पर निर्भर होना पड़ रहा है। कई लोगों ने कहा कि रोजाना समय और खर्च दोनों बढ़ गए हैं।
स्थानीय प्रधान और यात्रियों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि शीघ्र बस खरीद कर चयनित मार्गों पर संचालन शुरू कराया जाए। कहा जा रहा है कि बस उपलब्ध होते ही बाकी मार्गों पर भी सेवा शुरू कर दी जाएगी।
अगले कदम के तौर पर विभाग प्रकरणों की समीक्षा कर रहा है और बस खरीद से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। योजनाकारों ने लोगों से कहा है कि वे अपनी आवश्यकताओं और सुझावों से संबंधित अधिकारियों को अवगत कराएं ताकि रूट‑समायोजन संभव हो सके।
स्रोत: अमर उजाला

