M3M Commercial Project : मुख्य सचिव ने रद्द किया पूर्व आदेश, एम3एम की दोनों कमर्शियल परियोजनाएं बहाल

मुख्य सचिव ने रद्द किया पूर्व आदेश, एम3एम की दोनों कमर्शियल परियोजनाएं बहाल
UPT | M3M Commercial Project

Jun 11, 2024 18:33

मुख्य सचिव के इस फैसले से परियोजना में निवेश करने वाले घर खरीददारों को काफी राहत मिली है। हालांकि, अभी शासन इस मामले पर सुनवाई करेगा इसके बाद ही अंतिम निर्णय...

Jun 11, 2024 18:33

Short Highlights
  • एम3एम की प्रॉपर्टी की सील हटाने का निर्देश दिया गया है
  • फैसले से निवेश करने वाले घर खरीददारों को काफी राहत मिली
  • सहायक कंपनियों ने भूखंडों के आवंटन के लिए तय मानदंडों को पूरा नहीं किया था

 

Noida News : उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव (औद्योगिक विकास) श्री अनिल कुमार सागर ने नोएडा प्राधिकरण के सीईओ को एम3एम की प्रॉपर्टी की सील हटाने का निर्देश दिया है। जिसके बाद अब पूर्व के निर्णय को प्रभावी रूप से रद्द कर दिया गया है। मुख्य सचिव के इस फैसले से परियोजना में निवेश करने वाले घर खरीददारों को काफी राहत मिली है। हालांकि, अभी शासन इस मामले पर सुनवाई करेगा इसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। बता दें कि एम3एम की दो सहायक कंपनियों स्काइलाइन प्रोपकॉन प्राइवेट लिमिटेड और लैविश बिल्डमार्ट प्राइवेट लिमिटेड के करीब एक हजार करोड़ रुपये की कीमत के भूखंड का निरस्तीकरण कर दिया गया था। जिसके बाद नोएडा प्राधिकरण की तरफ से इस भूखंड को सील करके कब्जे में ले लिया गया था। 

निवेशकों में खुशी का माहौल
इस निर्णय से परियोजना में निवेश करने वाले घर खरीददारों में खुशी का माहौल देखने को मिल रहा है। वहीं निवेशकों में से एक संजीव कुमार ने इस फैसले पर राहत व्यक्त करते हुए कहा, यह आदेश मेरे जैसे लोगों के लिए बहुत बड़ी राहत लेकर आया है। मैंने इस प्रॉपर्टी के लिए अपने जीवन भर की बचत का निवेश किया था। दरअसल, हाल ही में नोएडा प्राधिकरण ने एम3एम की परियोजना को सील कर दिया था। जबकि कंपनी पहले ही काफी राशि इसमें निवेश कर चुकी थी। ऐसे में परियोजना को नोएडा प्राधिकरण द्वारा आयोजित नीलामी के माध्यम से एम3एम को आवंटित किया गया था। अचानक हुई सीलिंग ने निवेशकों और डेवलपर दोनों को चौंका दिया था। वहीं आज इस फैसले को रद्द करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव ने सील हटाने का निर्देश दिया।
जानें पूरा मामला
दरअसल, बीते साल 2023 में नोएडा प्राधिकरण को शिकायत मिली थी कि इन भूखंडों के आवंटन में नियमों का उल्लंघन हुआ है। इस शिकायत में ये भी कहा गया था कि एम3एम की सहायक कंपनियों ने भूखंडों के आवंटन के लिए तय मानदंडों को पूरा नहीं किया है। जिसके बाद यूपी सरकार ने इसकी जांच की और हाल ही में सेक्टर-72 और सेक्टर 94 में स्थित दो भूखंडों का आवंटन रद्द कर दिया। वहीं आवंटन के बाद प्राधिकरण को इन दोनों कंपनियों से 450 करोड़ रुपये मिल चुके हैं। दोनों कंपनियों स्काइलाइन प्रोपकॉन प्राइवेट लिमिटेड और लैविश बिल्डमार्ट प्राइवेट लिमिटेड पर आरोप है कि पांच लाख रुपये की अतिरिक्त बोली लगाने वाले सिंगल बिड के तहत आवंटन किया गया। जबकि सेक्टर-94 में स्थित भूखंड का रिजर्व प्राइस 827 करोड़ 35 लाख और सेक्टर-72 में स्थित भूखंड का रिजर्व प्राइस 176 करोड़ 48 लाख रुपये था।

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