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Ganga Dussehra 2024 : सिद्ध, वरियान, रवि व बुधादित्यचार योगों में मनाया जाएगा गंगा दशहरा

सिद्ध, वरियान, रवि व बुधादित्यचार योगों में मनाया जाएगा गंगा दशहरा
UPT | गंगा दशहरा 2024 पर चार शुभ योग लग रहे हैं।

Jun 11, 2024 15:40

गंगा दशहरा पर जीवन के नकारात्मक प्रभावों को तिरोहित करने वाला योग बना रहा है। गंगा सप्तमी पर तो माँ गंगा ब्रह्मा के कमंडल व भगवान विष्णु के चरणों में स्थापित हुई

Jun 11, 2024 15:40

Short Highlights
  • गंगा दशहरा पर सूर्य मिथुन में और चंद्रमा कन्या राशि में 
  • सूर्योदनी गंगा दशहरा 16 जून को मनाया जाएगा
  • गंगा तट पर जो भी स्नान ध्यानपूजा जप दान 
Ganga Dussehra 2024 : इस बार गंगा दशहरा पर चार शुभ योग लग रहे हैं। जिससे गंगा दशहरा का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। गंगा दशहरा 16 जून रात 02:34 ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि प्रारम्भ हो रही है जो 17 जून को प्रातः04:45 तक रहेगी। दिन व्यापनी गंगा दशहरा के रूप में स्नान दान व्रत पूजा आदि के रूप में सूर्योदनी गंगा दशहरा 16 जून को मनाया जाएगा।

इस दिन एक साथ चार शुभ योग
इस दिन एक साथ चार शुभ योग वरियान योग,सिद्ध योग, रवि योग व बुधादित्य योग के अलावा हस्त नक्षत्र लग रहा है। गंगा दशहरे पर सूर्य मिथुन राशि में तथा चंद्रमा कन्या राशि पर विचरण कर रहे होंगे। पंडित दुलीचंद शर्मा ने बताया कि गंगा दशहरा पर जीवन के नकारात्मक प्रभावों को तिरोहित करने वाला योग बना रहा है। गंगा सप्तमी पर तो माँ गंगा ब्रह्मा के कमंडल व भगवान विष्णु के चरणों में स्थापित हुई किन्तु गंगा दशहरा पर भगवान शिव की जटाओं में समाहित होते हुए स्वर्ग की गंगा नदी पृथ्वी वासियों के लिए अपना मूल आध्यात्मिक धाम छोड़ करमोक्ष यात्रा में सहयोगिनी पवित्र गंगा का आभार व्यक्त करने का दिन है। 

गंगा दशहरा पर स्नान, दान आदि मुहूर्त समय
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:08 बजे से 04:56 शाम तक रहेगा। लाभामृत मुहूर्त सुबह 08:52 बजे से दोपहर 12:21 तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:53 बजे से 12:49 तक होगा। 

क्या करें विशेष गंगा दशहरे पर 
गंगा स्नान से पूर्व गंगा का जल अपने दायें हाथ से दायें से बायें बायें से दायें करें। ध्यान करें तीनों महादेवों का तथा उनकी तीनों शक्तियों का व तीनों लोकों का तथा शिव के तीनों नेत्रों का। इसके बाद देव ऋषि व पितरों को जल अर्पण करें। इसके बाद जल में प्रवेश करने से पूर्व अपनी अंजुली से जल लेकर मस्तक पर लगायें तथा गंगा जल में प्रवेश करें। गंगाजल में स्नान करते समय मुख पूर्वोत्तर दिशा में होना चाहिए तथा अपने ईष्ट का ध्यान करके जाप करना चाहिए।
 

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