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नगीना लोकसभा : यहां नेता नहीं बल्कि जनता किंग, कोई भी पार्टी दोबारा नहीं जीती, जानें मौजूदा समीकरण

यहां नेता नहीं बल्कि जनता किंग, कोई भी पार्टी दोबारा नहीं जीती, जानें मौजूदा समीकरण
UPT | Nagina Lok Sabha constituency

Apr 03, 2024 10:03

पूरे देश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में लोकसभा 2024 के चुनाव होने जा रहे हैं। इस चुनाव में मतदाता अपने सांसद को चुनने के लिए वोट करेगी। देश के साथ-साथ प्रदेश में भी 19 अप्रैल से शुरू होकर चुनाव 1 जून को खत्म होगा। चुनावों के परिणाम 4 जून को आएंगे। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश टाइम्स प्रदेश हर लोकसभा सीट के मिजाज और इतिहास को आप तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है। इस अंक में पढ़ें नगीना लोकसभा क्षेत्र के बारे में...

Apr 03, 2024 10:03

Short Highlights
  • नगीना लोकसभा क्षेत्र में अब तक तीन लोकसभा के चुनाव हुए हैं। जिसमें तीन अलग-अलग पार्टियों को सफलता मिली है।
  • नगीना लोकसभा सीट की अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है।
Nagina Lok Sabha constituency : उत्तर प्रदेश के जिले बिजनौर में दो संसदीय सीट आती है। इसमें एक सीट बिजनौर तो दूसरी सीट नगीना है। लोकसभा क्षेत्र का इतिहास बहुत पुराना नहीं है। साल 2008 में परिसीमन के बाद यह संसदीय क्षेत्र अस्तित्व में आया था। यह सीट अनुसूचित जाति के लिए रिज़र्व है। इस सीट पर हुए तीन लोकसभा चुनाव में तीन अलग -अलग पार्टी ने चुनाव जीता है। इस सीट पर किसी एक पार्टी का दबदबा नहीं रहा है। प्रदेश की तीन बड़ी पार्टियों समाजवादी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने यहां से अब तक एक-एक चुनाव जीते हैं। इस संसदीय क्षेत्र में दलित और मुस्लिम समाज की बहुलता है। नगीना संसदीय क्षेत्र में मुस्लिम आबादी 28% है तो दलित आबादी 22% है। इसके अलावा जाट 8%, राजपूत 8%, ब्राह्मण 7% है। इसके साथ ही बनिया 4%, सैनी 6%, कहार 3% है। बाकि 11% में अन्य छोटी-बड़ी जातियां शामिल हैं।

3 चुनाव में तीन पार्टी को मिली जीत
नगीना लोकसभा क्षेत्र में अब तक तीन लोकसभा के चुनाव हुए हैं। जिसमें तीन अलग-अलग पार्टियों को सफलता मिली है। परिसीमन के बाद यहां पहला चुनाव साल 2009 में हुआ था। जिसमें समाजवादी पार्टी के यशवीर सिंह को सफलता मिली थी। यशवीर सिंह ने बसपा के राम किशन सिंह को तकरीबन 60 हजार वोटों से हराया था। राष्ट्रीय लोकदल के उम्मीदवार मुंशी रामपाल तीसरे नंबर पर रहे थे। वहीं 2014 के चुनाव में जहां पूरे देश में मोदी की लहर थी। इस सीट पर भी भारतीय जनता पार्टी के यशवंत सिंह को जीत मिली थी। दूसरे नंबर पर सांसद यशवीर सिंह रहे थे। जिनको 90 हजार से ज्यादा मतों से हार का सामना करना पड़ा था। बसपा के गिरीश चंद्र तीसरे नंबर पर रहे थे। देशभर में अगला आम चुनाव साल 2019 में हुआ था। इस चुनाव में प्रदेश की दो बड़ी पार्टियां सपा और बसपा ने आपस में गठबंधन कर लिया था। जिससे प्रदेश की पूरे 80 सीट पर समीकरण बदल गए थे। इस चुनाव में बसपा के हाथ 5 सीटें लगी थी। जिसमें एक सीट नगीना भी थी। इस चुनाव में बसपा के गिरीश चंद्र को जीत मिली थी। दूसरे नंबर पर भाजपा के यशवंत सिंह रहे थे। इनको गिरीश चंद्र ने 166832 के भारी अंतर से हराया था।

सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी
नगीना लोकसभा सीट की बात करें तो ये सीट वैसे तो अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है, लेकिन यहां सबसे ज्यादा आबादी मुस्लिम समुदाय की है। इस सीट पर 28% मुस्लिमों की आबादी है। जो बाकि किसी भी समुदाय में सबसे ज्यादा है। इसलिए बाकी कई सीटों की तरह इस सीट पर भी मुस्लिम वोट निर्णायक भूमिका में है। लेकिन बसपा और सपा के अलग-अलग चुनाव लड़ने से मुस्लिम वोट बंट सकता है। जिससे भाजपा को फायदा हो सकता है। साथ ही दलित आबादी भी इस सीट पर 22% है। इससे बसपा के उम्मीदवार को फायदा हो सकता है। लेकिन साथ ही भारतीय जनता पार्टी भी दलित वोट में सेंध मार सकती है। ये देखना दिलचस्प होगा कि इस धर्म और जाति के समीकरण से किसको कितना फायदा होता है।

विधानसभा चुनाव में सपा का है दबदबा
नगीना लोकसभा क्षेत्र में 5 विधानसभा आती है। इसमें नजीबाबाद, नगीना, धामपुर, नेहतौर और नूरपुर शामिल है। इन पांच सीट में से 3 सीट समाजवादी पार्टी के पास है। सपा ने साल 2022 के विधानसभा चुनाव में नजीबाबाद, नगीना और नूरपुर की सीटें जीती थीं। वहीं धामपुर और नेहतौर की सीटें भारतीय जनता पार्टी के पास गई थी। विधानसभा चुनावों के नतीजे को देखें तो इस सीट पर सपा का प्रभुत्व माना जा रहा है। लेकिन भाजपा और रालोद के गठबंधन से इस सीट पर भाजपा मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। वहीं पिछले लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा का  गठबंधन था। जिस कारण इस सीट पर मुस्लिम और दलित की बहुलता होने के कारण महागठबंधन को एक बड़ी जीत मिली थी। लेकिन इस बार समीकरण अलग होने के कारण चुनाव मजेदार होने की उम्मीद है। इस चुनाव में सपा और बसपा अलग-अलग चुनाव लड़ रही है। इस चुनाव में बसपा के उम्मीदवार के रूप में सुरेंद्र पाल सिंह मैदान में हैं तो दूसरी तरफ सपा ने मनोज कुमार को मौका दिया है। भारतीय जनता पार्टी  की तरफ से ओम कुमार चुनाव लड़ेंगे।

चंद्रशेखर के आने से बढ़ी सरगर्मी  
आजाद समाज पार्टी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद भी इस सीट से अपनी किसमत आजमा रहे हैं। आजाद के इस सीट से चुनाव लड़ने से यहां का गणित काफी दिलचसप हो गया है। क्योंकि दलित आबादी नगीना सीट पर मुस्लिम के बाद सबसे ज्यादा है। दलित वोट बैंक पर  चंद्रशेखर और मायावती के साथ-साथ भाजपा और सपा की भी नजर है। नगीना के लिए कहा जाता है कि मुस्लिम-दलित जिसके तरफ हो जाती है, उसका चुनाव में जीतना तय हो जाता है। साथ ही ये बात भी जानने की है कि चंद्रशेखर आजाद करीब दो साल से नगीना से चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे हुए थे। चंद्रशेखर आजाद के अलावा सपा ने इस सीट से मनोज कुमार को मैदान में उतारा है तो बहुजन समाज पार्टी ने सुरेंद्र पाल को मैदान में उतारा है। बीजेपी के टिकट पर मनोज कुमार मैदान में हैं। यह देखना मजेदार होगा कि आखिर इस मुस्लिम और दलित बाहुल आबादी वाली सीट पर जनता किस पर भरोसा जताती है।

एक जालियांवाला बाग नगीना में भी हुआ था
अंग्रेज़ों के शासन काल में इस क्षेत्र का भी अनोखा इतिहास रहा है। इस क्षेत्र के बारे में ऐसी बात कही जाती है कि पंजाब का चर्चित जलियावाला बाग हत्याकांड जैसी एक घटना इस क्षेत्र में भी हुई थी। आजादी की जंग में 21 अप्रैल 1858 को नगीना के पाईबाग पहुंची ब्रिटिश सेना पर दो युवकों ने बंदूक से फायर कर दिया था। इन दोनों युवक का नाम इनामत रसूल और जान मुहम्मद महमूद था। इसके जवाब में अंग्रेजी सेना ने भी फायर कर दिया था। अंग्रेजी सेना ने निहत्थे लोगों पर गोलियां बरसा दी थी। जिसमें करीब 150 निहत्थे लोगों की मौत हो गई थी।इसलिए इस हत्याकांड को नगीना का जलियावालां बाग हत्याकांड कहा जाता है।

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