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मुरादाबाद लोकसभा : इस सीट पर मुस्लिम राजनेताओं का बोलबाला लेकिन आज तक कोई महिला नहीं जीती, पार्टियों में बसपा का रिकॉर्ड सबसे खराब

इस सीट पर मुस्लिम राजनेताओं का बोलबाला लेकिन आज तक कोई महिला नहीं जीती, पार्टियों में बसपा का रिकॉर्ड सबसे खराब
UPT | Moradabad Lok Sabha

Apr 04, 2024 07:00

पूरे देश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में लोकसभा 2024 के चुनाव होने जा रहे हैं। इस चुनाव में मतदाता अपने सांसद को चुनने के लिए वोट करेगी। देश के साथ-साथ प्रदेश में भी 19 अप्रैल से शुरू होकर चुनाव 1 जून को खत्म होगा। चुनावों के परिणाम 4 जून को आएंगे। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश टाइम्स प्रदेश हर लोकसभा सीट के मिजाज और इतिहास को आप तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है। इस अंक में पढ़ें मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र के बारे में...

Apr 04, 2024 07:00

Short Highlights
  • मुरादाबाद से सपा ने अपना उम्मीदवार बदलकर रुचि वीरा को मैदान में उतारा है।
  • इस सीट से अधिकतर चुनाव मुस्लिम समाज से आने वाले उम्मीदवार ने जीता है।
Moradabad Lok Sabha constituency : मुरादाबाद अपने राजनितिक हलचल के साथ -साथ पीतल के काम के लिए देश-दुनिया में काफी विख्यात है। मुरादाबाद शहर अपने आधुनिक कारीगरों के लिया प्रसिद्ध है। यहां के कारीगर की ओर से तैयार किए गए आधुनिक, देखने में सुंदर और कलात्मक पीतल के बर्तन, गहने और अन्य चीजें दुनियाभर में भेजी जाती हैं। पीतल के बर्तन अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन जैसी अन्य देशों में भेजी जाती है। मुरादाबाद सीट के लिए यह खास बात है कि अब तक हुए 17 लोकसभा के चुनाव में 11 मुस्लिम सांसद चुने गए हैं। हालांकि इस सीट पर 28 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं। जिस वजह से यह परिणाम देखने को मिलते हैं। मुस्लिम वोट के अलावा इस सीट पर दलित 15 %, ब्राह्मण 6%, वैश्य 6%, और कायस्थ 1 % हैं। इसके अलावा जाट 9%, सिख-पंजाबी 2.5% हैं। वहीं यादव, गुर्जर, कांछी, बागवान 4-4% हैं। साथ ही ईसाई 0.5% हैं। इन सबके अलावा बाकि जातियां 8% हैं। इस लोकसभा क्षेत्र में 5 विधानसभा आते हैं।

पहली बार 1952 में हुए चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस को जीत मिली थी। इस चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार राम सरन को जीत मिली थी। अगले लोकसभा चुनाव जो 1957 में हुए थे। उस चुनाव में भी सांसद राम सरन ने ही कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता था। जो निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में थे। 1967 और 1971 के चुनाव में यह संसदीय सीट भारतीय जनसंघ ने जीती थी। 1967 के चुनाव में जन संघ के प्रत्याशी ओम प्रकाश त्यागी ने चुनाव जीता था तो 1971 के चुनाव में वीरेंद्र अग्रवाल ने जीत हासिल की थी। इसके बाद देश में लगी इमरजेंसी की वजह से कांग्रेस को खासा नुकसान हुआ। इसलिए 1977 और 1980 के चुनावमें भी कांग्रेस को हार देखने को मिली थी। लेकिन माहौल तब बदला जब इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए चुनाव मेंकांग्रेस को जीत मिली। इस चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार हाफिज़ सिदिक ने मैदान फतह की थी। इस चुनाव में उन्होंने लोक दल के उम्मीदवार गुलाम खान को हराया था। वहीं 1989 में फिर देशभर में आम चुनाव हुए। इस चुनाव में कांग्रेस को फिर से हार का मुँह देखना पड़ा। 1989 और 1991 दोनों चुनाव में जनता दल के गुलाम खान ने चुनाव जीता था। इस समय तक उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की तूती बोलती थी। इसी का नतीजा 1996 और फिर 1998 के चुनाव में देखने को मिला। 1996 और फिर 1998 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार शफीकुर्रहमान बर्क को जीत मिली।1999 के चुनाव में कांग्रेस छोड़ अपनी पार्टी बनाने वाले जगदंबिका पाल ने अखिल भारतीय लोकतांत्रिक कांग्रेस की स्थापना की थी। इस चुनाव में उन्होंने चंद्र विजय सिंह को मैदान में उतारा था। जिन्हें जीत भी मिली थी। 2004 के चुनाव में सपा को फिर से जीत मिली थी। पूर्व सांसद शफीकुर्रहमान बर्क फिर से सांसद चुने गए। कई चुनावों में हार के बाद 2009 के चुनाव में कांग्रेस ने इस सीट को जीता। 2009 के चुनाव में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन पर कांग्रेस ने दांव लगाया था। इस चुनाव में क्रिकेटर ने जीत हासिल की थी। उन्होंने बीजेपी के कुंवर सर्वेश कुमार सिंह को लगभग 50 हजार मतों से चुनाव हराया था। लेकिन 2014 के चुनाव में देश में मोदी लहर चल रही थी। जिस पर सवार होकर भारतीय जनता पार्टी के कुंवर सर्वेश कुमार सिंह ने चुनाव जीता। उन्होंने सपा के उम्मीदवार एचटी हसन को 80 हजार से ज्यादा मतों से चुनाव हराया था। वहीं साल 2019 के आम चुनाव में देश भर में मोदी लहर होने के बावजूद इस सीट पर भाजपा को जीत नहीं मिली। इस चुनाव में सपा के एचटी हसन ने भाजपा के सर्वेश कुमार को तबकरीबन 98 हजार वोटों से मात देकर संसद पहुंचे थे।

विधानसभा के 5 सीट में से 3 सपा के पास
मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र में 5 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इसमें बरहापुर, कांठ, ठाकुरद्वारा, मुरादाबाद ग्रामीण, मुरादाबाद शहरी शामिल है। इन पांच विधानसभा में से 3 पर समाजवादी पार्टी के विधायक हैं जबकि 2 सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवार ने जीत हासिल की थी। विधानसभा के ट्रेंड को देखें तो 5 में से 3 सीट पर सपा मजबूत है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि 2022 के विधानसभा के चुनाव में रालोद और सपा ने मिलकर चुनाव लड़ा था। लकिन लोकसभा के चुनाव में जयंत चौधरी ने भाजपा के साथ गठबंधन कर लिया है। जिससे समीकरण बिलकुल उल्टा होता दिखाई दे रहा है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि मुस्लिम समुदाय इस सीट पर 28 फीसदी है। जिससे सपा को फायदा हो सकता हैं। पिछले लोकसभा के चुनाव में भी सपा के उम्मीदवार एचटी हसन को जीत मिली थी। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा और सपा ने एक साथ मिलकर चुनाव लड़ा था।

इस सीट से मुसलमान ने जीते 11 चुनाव
मुरादाबाद संसदीय सीट की बात करें तो इस सीट पर अब तक हुए 17 लोकसभा चुनाव में 11 बार मुस्लिम उम्मीदवारों को जीत मिली है तो 6 बार अन्य उम्मीदवारों के खाते में जीत गई है। मुरादाबाद संसदीय क्षेत्र में मुस्लिम वोटों की संख्या 28 फीसदी है। इसलिए मुस्लिम समाज की राजनीति करने वाली पार्टियां इस सीट पर जीत का दावा करती हैं।

बदल गया सपा का उम्मीदवार
चुनाव से पहले इस सीट पर उम्मीदवार को लेकर सपा में भयंकर घमासान मच गया था। लोकसभा चुनाव 2024 की बात करें तो मुरादाबाद लोकसभा सीट पर  मौजूदा सांसद डा. एसटी हसन को नामांकन करने के बाद उनका टिकट काट कर रुचि वीरा को मौका दिया गया है। वहीं भाजपा के पूर्व सांसद सर्वेश सिंह फिर से ताल ठोकते नजर आएंगे। भाजपा के प्रत्याशी सर्वेश सिंह ने वर्ष 2014 में सपा प्रत्याशी डॉ.एसटी हसन को हराया था वहीं अगले चुनाव में बदला लेते हुए साल 2019 के चुनाव में सपा के डा. एसटी हसन ने भाजपा के सर्वेश सिंह को हराकर हिसाब बराबर कर लिया था। अब यह देखना दिलचसप होगा कि उम्मीदवार को बदलना सपा के लिए फायदेमंद साबित होगा या भाजपा बाजी मार लेगी।

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