मोरना। करहेड़ा गांव के किसान गौरव चौधरी की चार बीघा जमीन में गेंदा खिला हुआ है, लेकिन किसान मायूस बैठा है। मंडियों में फूलों की कीमतें 10 से 15 रुपये प्रति किलो तक नीचे आ गई हैं और खरीदार नहीं मिल रहे हैं।
यह समस्या अकेले गौरव की नहीं है। करहेड़ा, ककराला, तिस्सा, बेहड़ा सादात, खाइखेड़ा, टंडेढ़ा, भोपा और ककरौली के किसान मिलाकर 115 बीघा में गेंदा उगाते हैं। किसान बताते हैं कि खेतों में काम का खर्च व तुड़वाने का खर्च भी निकलना अब मुश्किल दिख रहा है।
मंडी और खरीदार की कमी
किसान दीपक ने कहा कि मेरठ, दिल्ली, मीरापुर, फलावदा व देहरादून जैसी मंडियों में गेंदा का भाव मात्र 10 से 15 रुपये प्रति किलोग्राम चल रहा है। इतनी सस्ती कीमत के बावजूद मंडियों में फूलों का कोई खरीदार नहीं मिल रहा है। खेती में नकद खर्च का अनुमान भी किसानों ने दिया है।
- एक बीघा में करीब 1,500 पौधे रोपित होते हैं।
- पौधे पश्चिम बंगाल से मंगवाए गए थे और प्रति पौधे की कीमत 80 पैसे रही।
- एक बीघा पर कुल नकद खर्च करीब 5,000 रुपये से अधिक हुआ।
करहेड़ा के रविंद्र कहते हैं कि अक्तूबर में मांग बढ़ने की उम्मीद रहती थी, पर इस बार भाव उल्टा चले गए। किसान सोनू, लाला और बालिंद्र भी बताते हैं कि लागत निकाल पाना मुश्किल है और “अब फसल को जोतने की नौबत आ गई है।”
मेरापुर मंडी के आढ़ती जोनी ने कहा, “यकायक मांग कम हुई है।” उन्होंने बताया कि इस साल त्यौहारों और शादियों के आयोजनों में फिलहाल रुकावट आई है, इसलिए कीमतें पिछले सालों के मुकाबले गिर गईं।
आगे क्या होगा
किसान सरकार से सुरक्षा योजना की मांग कर रहे हैं ताकि उनकी लागत बच सके और फसल नष्ट न हो। अभी अधिकतर किसान और आढ़ती स्थिति का आकलन कर रहे हैं और खरीदार मिलने तक खेतों में फूल रखे रहने की चिंता जताते हैं।
स्रोत: अमर उजाला

