सांगीपुर। सांगीपुर के सीएचसी में स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत खराब है और मरीजों की भीड़ से व्यवस्था थकी हुई नजर आती है। प्रतिदिन यहां औसतन 300 रोगियों का ओपीडी पंजीयन होता है और भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या करीब 15 प्रतिदिन है।
सीएचसी में इलाज की जिम्मेदारी दो डॉक्टरों के कंधों पर है। अधीक्षक डॉ. धर्मेंद्र शुक्ल और फिजिशियन के रूप में तैनात डॉ. आशीष गुप्ता सेवा दे रहे हैं। सर्जन, नेत्र, ईएनटी, दंत, आर्थो और बाल रोग विशेषज्ञ के पद खाली हैं, इसलिए कई मरीजों को वापस लौटना पड़ता है।
कमी और असर
सीएचसी सीमा पर होने के कारण दो जनपदों से मरीज यहां आते हैं और दबाव ज्यादा रहता है। दंत विभाग में ताला लगा रहता है और महिलाएं भी डॉक्टर न होने से खासतौर पर परेशान हैं। एक्सरे सुविधा तो है पर वहां फिल्म नहीं मिलती और रिपोर्ट मोबाइल पर भेज दी जाती है।
सीएचसी अधीक्षक ने समस्या बताते हुए कहा, “विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से दिक्कत है। स्टाफ कम है। आरबीएसके टीम के डॉक्टरों से सहयोग लिया जा रहा है। शासन को कई बार पत्र लिखा गया है। जल्द ही पद भरने की उम्मीद है।”
गांव के लोगों ने भी समस्याएं बताईं। रामशरण वर्मा ने कहा, “आंख में समस्या है। सीएचसी आया था। यहां आंख के डॉक्टर ही नहीं हैं। अब निजी डॉक्टर या मुंशीगंज जा रहा हूं।” भारत सिंह ने बताया, “दांत के दर्द के चलते तीन दिनों से सो नहीं पाया। सीएचसी में दिखाने आया तो देखा दंत विभाग में ताला लटका था। डॉक्टर नहीं होने के कारण वापस जाना पड़ रहा है।”
आगे क्या होगा
सीएचसी के अधीक्षक का कहना है कि प्रशासन को कई बार पत्र भेजे गए हैं और पद भरने की उम्मीद है। तब तक मरीजों को नजदीकी लालगंज सीएचसी, अमेठी या मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विशेषज्ञ न मिलने से वे निजी क्लीनिकों पर निर्भर हो रहे हैं।
स्रोत: अमर उजाला

