सहारनपुर। शनिवार दोपहर एक बजे से रविवार सुबह चार बजे तक जनपद में लगातार बूंदाबांदी चली। इससे तापमान में लगभग आठ डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई और मौसम ठंडा हो गया।
सुबह पंखे भी बंद करने पड़े और रविवार को पूरे जिले में बादल छाए हुए दिखे। शाकंभरी देवी में बाढ़ की आशंका को देखते हुए श्रद्धालुओं के दर्शन दूसरे दिन भी रोक दिए गए।
पश्चिमी यूपी में मौसम का मिजाज
मेरठ, मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर और शामली में बारिश या बूंदाबांदी जारी रही। मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बादल बने रहेंगे और हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। तापमान में और गिरावट आने की संभावना जताई गई है।
शामली में रात भर रुक-रुककर बूंदाबांदी हुई और सुबह से फिर बादल छाए हुए हैं। मुज़फ्फरनगर में भी रात में रुक-रुककर बारिश हुई; सुबह कोल्हू का काम रोकना पड़ा क्योंकि ईंधन गीला हो गया।
किसानों के लिए खतरे और फायदे
कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरएस सेंगर ने बताया कि इस समय धान, गन्ना, मक्का, बाजरा, उड़द और मूंग जैसी खरीफ फसलें खेतों में खड़ी हैं। जिन खेतों में फसल पकने की अवस्था में पहुंच गई है, वहां तेज हवा और बारिश से पौधे झुककर गिर सकते हैं।
डॉ. सेंगर ने कहा कि लगातार नमी से दलहनी फसलों में फफूंद और सड़न का खतरा बढ़ जाता है। गन्ने के खेतों में पानी लंबा जमा रहने पर जड़ों को हवा नहीं मिलती और पौधों की सेहत प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि फिलहाल खेतों में अतिरिक्त सिंचाई न करें और रासायनिक दवाओं व उर्वरकों का छिड़काव रोकें। मौसम साफ होने और खेतों से अतिरिक्त पानी निकलने के बाद ही जुताई या बुवाई करें ताकि मिट्टी उपयुक्त स्थिति में हो।
बारिश का सीधा असर खरीफ फसलों पर खतरे के रूप में दिख सकता है, लेकिन मिट्टी में बनी नमी आगामी रबी मौसम की तैयारियों के काम आएगी और शुरुआती सिंचाई की जरूरत कम कर सकती है।
स्रोत: अमर उजाला

