सहारनपुर। फर्नीचर बनवाते समय सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि कौन सी लकड़ी दीमक, घुन और दरार से सुरक्षित रहे और लंबे समय तक टिके। शहर के लकड़ी कारोबारियों का कहना है कि लकड़ी की प्रजाति के साथ उसकी दूसरी तैयारियां भी उतनी ही जरूरी हैं।
तंजीम नवाज के मुताबिक “फर्नीचर बनाने के लिए शीशम और सागवान की लकड़ी सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाती है.” उन्होंने कहा कि नीम और आम की लकड़ी भी अलग‑अलग सामान बनाने में काम आती है। सहारनपुर की बने वस्तुएं देश के अलावा विदेशों तक भेजी जाती हैं और वहां गिफ्ट आइटम के लिए मैंगो व एकेसिया जैसी लकड़ियाँ भी मांग में रहती हैं।
ट्रीटमेंट और सीजनिंग का महत्व
लकड़ी को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए पहले केमिकल ट्रीटमेंट किया जाता है और फिर सीजनिंग की जाती है। तंजीम नवाज ने बताया कि इसमें बोरिक और बोरेक्स जैसे केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। उनके मुताबिक इस ट्रीटमेंट से लकड़ी को घुन और दूसरे नुकसान से बचाने में मदद मिलती है और उसकी उम्र भी बढ़ती है।
सीजनिंग से लकड़ी के अंदर की नमी कम की जाती है। तंजीम नवाज ने कहा कि “जब लकड़ी शुरुआत में आती है तो उसमें नमी की मात्रा करीब 95 प्रतिशत तक हो सकती है. सीजनिंग के बाद इसे करीब 10 से 14 प्रतिशत नमी के स्तर तक लाया जाता है.” इस नमी के स्तर को नक्काशी और फर्नीचर तैयार करने के लिए बेहतर बताया गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि सिर्फ भट्टी में सुखाने और सही तरीके से सीजनिंग करने में फर्क होता है। “ज्यादा तापमान पर लकड़ी को सुखाने से वह काफी हार्ड हो सकती है. बाद में जब ऐसी लकड़ी नमी वाले वातावरण में जाती है तो वह दोबारा नमी पकड़ सकती है.” गलत प्रक्रिया से समस्याएँ बढ़ सकती हैं।
खरीददारों के लिए सलाह
फर्नीचर खरीदते समय केवल रंग या चमक देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। लकड़ी की प्रजाति के साथ यह जरूर देखना चाहिए कि उसका ट्रीटमेंट और सीजनिंग सही तरीके से हुआ है या नहीं। तंजीम नवाज के अनुसार सही तैयारी से लकड़ी की लाइफ करीब 10 से 15 साल तक बढ़ सकती है, पर उम्र इसके उपयोग और रखरखाव पर भी निर्भर करती है।
स्रोत: News18

