शाहजहांपुर। रामगंगा और बहगुल नदियों में लगातार बढ़ रहा पानी जिले के कई गांवों में बड़ी मुश्किल पैदा कर चुका है। शनिवार को अल्हागंज के डबरी घाट पर रामगंगा का जलस्तर चार सेंटीमीटर और बढ़कर खतरे के निशान से 80 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया।
कसारीकलां, कसारी खुर्द, कुंडरी, मंझरा, उइला, थाथरमई, काजरबोझी, बलदेवपुर, तेरा और शाहपुर जैसे गांवों की गलियों और रास्तों में कई फुट तक पानी भरा हुआ है। करीब आठ दिन से बिजली आपूर्ति ठप है और धान, उड़द, तिल व मक्का की फसलें बर्बाद हो गई हैं। घरों के आसपास पानी भरा होने से पशुओं को बांधने तक की जगह नहीं बची है और ग्रामीण परिवार अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में जूझ रहे हैं।
प्रशासन की व्यवस्थाएँ और राहत
शनिवार को एडीएम वित्त एवं राजस्व अरविंद कुमार तिकोला गांव पहुंचे और बाढ़ प्रभावित परिवारों को भोजन के पैकेट वितरित किए। उनके साथ एसडीएम मधुसूदन गुप्ता, तहसीलदार राघवेश मणि त्रिपाठी और अन्य राजस्वकर्मी भी मौजूद रहे। एडीएम ने बताया कि कंट्रोल रूम के माध्यम से पूरे बाढ़ प्रभावित क्षेत्र की लगातार निगरानी जारी है और जलमग्न बस्तियों में रहने वाले परिवारों को भोजन के पैकेट पहुँचाए जा रहे हैं।
जैतीपुर में बहगुल नदी का पानी बढ़ने से नदी किनारे स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के परिसर में पानी पहुँच गया है। परिसर और कर्मचारियों के आवास चारों तरफ से पानी में घिर गए हैं, इसलिए कुछ कर्मचारियों को पुराने अस्पताल में शिफ्ट किया गया है। सीएचसी प्रभारी डॉ. मो. सजर ने बताया कि फिलहाल रात्रि सेवा बंद कर दी गई है और पानी कम होते ही रात में आने वाले मरीजों का इलाज पुनः शुरू किया जाएगा।
गर्रा व खन्नौत नदी का जलस्तर घटने के बाद भी सुभाषनगर और लोधीपुर क्षेत्र के खाली प्लॉटों और गड्ढों में पानी भरा है। इससे संक्रामक रोग फैलने का खतरा बढ़ गया है और मच्छर‑जनित बीमारियों का डर बना हुआ है। नगर निगम द्वारा पानी भरे स्थानों में एंटी लार्वा और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव तथा फॉगिंग कराई जा रही है।
क्षेत्र के पार्षद और नगर आयुक्त प्रभावित इलाकों में साफ‑सफाई तथा सुरक्षात्मक कार्य कराने के निर्देश दे रहे हैं। प्रभावित लोग जलस्तर के और बढ़ने की आशंका के बीच घरों में बने रहने को मजबूर हैं। प्रशासन ने लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और नदियों के किनारे नहीं जाने की अपील की है।
स्रोत: अमर उजाला

