उन्नाव। जिले में पिछली रात से तेज बारिश ने जनजीवन अस्त‑व्यस्त कर दिया। 24 घंटे में रिकॉर्ड 144.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जिससे कई जगहों पर मकान और सड़कें खतरे में आ गईं।
बारिश के कारण करीब 75 कच्चे घर ढह गए। इन घटनाओं में पिता‑पुत्री समेत छह लोग घायल हुए हैं। आठ मवेशियों की भी मौत की सूचना है। जिलाधिकारी ने 29 सितंबर तक ऑरेंज अलर्ट जारी कर लोगों से सावधानी बरतने को कहा है।
मुख्य नुकसान और बाधाएं
बारिश से सात मुख्य मार्गों पर पेड़ गिरने से यातायात पांच घंटे तक जाम रहा। कई क्षेत्रों में बिजली गुल हो गई और 36 घंटे बाद भी बिजली बहाल नहीं हो पाई। गंगा एक्सप्रेसवे पर सोनिक टोल प्लाजा के पास सड़क पर तीन फीट तक पानी भर गया। जल निगम कार्यालय और स्वास्थ्य केंद्रों में भी जलभराव से लोग परेशान रहे।
क्षेत्रवार नुकसान की बात करें तो बीघापुर में 28 और पुरवा में 22 कच्चे घर गिरे। सिकंदरपुर सरोसी के अलग‑अलग गांवों में 11 घर गिरने की सूचना मिली। लेखपाल और एसडीएम ने प्रभावित गांवों में सर्वे शुरू कर दिया है।
कई परिवारों के सामान मलबे में दब गए। धौकलखेड़ा निवासी रामदयाल के घर का तीन लाख रुपये का सामान मलबे में आकर दब गया। ग्राम प्रशासक पवन शर्मा ने बताया कि कुछ लोग रिश्तेदारों के यहां शरण लिए हैं और दो परिवारों को सरकारी स्कूल में रोका गया है।
घरों के ढहरने से अलग‑अलग स्थानों पर लोग मलबे में दबे। नवाबगंज विकासखण्ड के आशाखेड़ा में शिवनरेश और उनकी दोनों बेटियां मलबे में दबकर घायल हुईं और इलाज के लिए सीएचसी ले जाया गया। अन्य जगहों पर भी कई घायल अस्पतालों में भर्ती रहे।
कई मामलों में कच्ची दीवारों के गिरने से मवेशी दब गए। बंथर के पुरोहित इलाके में एक खाली पड़े कच्चे घर के ढहने से आठ गोवंश दबकर मर गए; पशु चिकित्साधिकारी ने पोस्टमार्टम कर दफन किया। अधिकारियों ने बरसात बंद होने के बाद नुकसान का पूरा आकलन कर रिपोर्ट एसडीएम को भेजने का कहा है।
प्रभावित लोग और गांव प्रशासन अब राहत और बहाली के इंतजाम बता रहे हैं। आवास के लिए जिन परिवारों के नाम पहले से पात्र हैं, उनका भुगतान जल्द कराने की बात कहीं जा रही है।
स्रोत: अमर उजाला

