उन्नाव। गंगा एक्सप्रेसवे पर बारिश के बाद हुए जलभराव की तहकीकात में रैंप की डिजाइन और लेवलिंग से जुड़ी तकनीकी खामी सामने आई है। जांच में पता चला है कि 132 केवी की ट्रांसमिशन लाइन बचाने के लिए रैंप का स्तर करीब तीन मीटर नीचे कर दिया गया था।
नियमानुसार सड़क और बिजली लाइन के बीच न्यूनतम ऊंचाई 12.5 मीटर रखनी होती है। स्रोतों के अनुसार तकनीकी समाधान के तौर पर 132 केवी लाइन को तीन मीटर ऊपर उठाने की जरूरत थी, लेकिन इसके बजाय रैंप का लेवल ही नीचे कर दिया गया।
डिजाइन में खामी और बदलाव
जानकारी में कहा गया है कि रैंप का सी-लेवल के हिसाब से स्तर करीब 127 मीटर होना चाहिए था, जबकि इसे करीब 124 मीटर पर बनाया गया। इस वजह से रैंप नेशनल हाईवे से भी नीचे चला गया और लगातार बारिश में उसी हिस्से में जलभराव बना रहा।
रैंप की ड्राइंग और अंतिम डिजाइन की जिम्मेदारी स्वतंत्र इंजीनियरिंग कंपनी ‘लायन इंजीनियरिंग’ की थी। नियमों के मुताबिक स्वतंत्र इंजीनियर को डिजाइन में बदलाव करने का अधिकार है, लेकिन ऐसे बदलाव तकनीकी व कानूनी मानकों के अनुरूप होने चाहिए और संबंधित प्राधिकरण को सूचित करना होता है।
जिम्मेदारी और आगे की कार्रवाई
निरीक्षण में खामी पाये जाने के बाद संबंधित अधिकारियों को सुधार के निर्देश दिए गए हैं। रैंप को निर्धारित लेवल पर लाने का खर्च इंजीनियरिंग कंपनी को उठाना होगा।
इसके अतिरिक्त मुख्य कैरिजवे और रैंप के बीच नया टावर लगाने तथा 132 केवी लाइन को ऊपर करने का खर्च UPEDA के स्तर से वहन किया जाएगा। जांच यह भी देखेगी कि डिजाइन में बदलाव किस स्तर पर किया गया और क्यों UPEDA को इसकी जानकारी नहीं दी गई।
स्थानीय अधिकारियों ने कहा है कि तकनीकी सुधार के साथ ही नियमों के उल्लंघन पर पेनाल्टी और ठेकेदार को चेतावनी दी जाएगी, ताकि भविष्य में इसी तरह के डिजाइन से जुड़े जोखिम न हों।
स्रोत: प्रभात खबर

