लखनऊ। उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग ने अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित सामग्री के आर्काइविंग नियमों को स्पष्ट किया है। विभाग ने बताया है कि किस तरह से समाचार, नोटिस और प्रेस विज्ञप्तियों को संग्रहित किया जाएगा और किस शर्त पर हटाया जा सकता है।
दफ्तर के निर्देश के अनुसार “नवीनतम समाचार और स्पॉटलाइट आइटम उनके प्रकाशन की तिथि से अंतिम तिथि दर्ज करने के बाद स्वचालित रूप से संग्रहीत किए जाएंगे।” साथ ही कहा गया है कि सभी समाचार/निविदाएं/नोटिस/घोषणाएं/प्रेस विज्ञप्तियां दी गई समाप्ति तिथि के बाद संग्रहीत की जाती हैं।
प्रक्रिया और अनुमोदन
वेब प्रबंधक जब किसी आइटम का विवरण दर्ज करेगा तो उसे संबंधित विभाग से उचित अनुमोदन के साथ समाप्ति तिथि दर्ज करनी होगी। जानकारी में स्पष्ट किया गया है कि केवल अनुमोदन के बाद ही आइटम की समाप्ति तारीख सिस्टम में दर्ज की जाएगी।
- वेब सूचना प्रबंधक या संबंधित प्राधिकरण (ईमेल के माध्यम से लिखित संचार) की मंजूरी के बाद ही अभिलेखागार से कोई वस्तु हटाई जाएगी।
दस्तावेज में यह भी बताया गया है कि संग्रहित आइटम सार्वजनिक आर्काइव में दिखाई नहीं भी दे सकते हैं, पर वे “सीएमएस डेटाबेस” में मौजूद रहेंगे। आवश्यक होने पर इन्हें डेटाबेस से एक्सेस किया जा सकेगा।
नियमों का उद्देश्य वेबसाइट पर प्रकाशित सामग्री का व्यवस्थित भंडारण और नियंत्रित हटाना बताया गया है। इससे सामग्री के जीवनचक्र का रिकॉर्ड बनेगा और गलती से हटाने की घटनाओं पर रोक लगेगी।
अगले कदम में विभाग ने कहा है कि वेब प्रबंधकों और संबंधित विभागों को इस नीति के अनुसार काम करना होगा। जो भी विभाग अपनी सामग्री की समाप्ति तिथि तय करने और अनुमोदन देने के लिए जिम्मेदार होंगे, वे निर्देशों का अनुपालन करें।
स्रोत: UP सूचना विभाग