वाराणसी। 308 पहियों वाला एक विशाल ट्रक गत कुछ दिनों से चर्चा में है। यह ट्रक डाफी टोल प्लाजा से गुज़रते हुए भी देखा गया और वहां से गुज़रने पर 693 रुपये का टोल टैक्स काटा गया।
ट्रक पर लगभग 200 टन वजनी औद्योगिक मशीन लदी है और वाहन का कुल ट्रेलर करीब 100 फीट लंबा और सात मीटर चौड़ा बताया गया है। मशीन की लंबाई करीब 41 मीटर है। यह उपकरण बेल्जियम से समुद्री मार्ग से भारत लाया गया था और पहले ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पर उतारा गया था।
लंबा, भारी और धीरे चलने वाला काफिला
विशेष मल्टी-एक्सल हाइड्रोलिक ट्रेलर के जरिए मशीन सड़क मार्ग से आगे भेजी जा रही है। काफिला ओडिशा, झारखंड और बिहार होते हुए उत्तर प्रदेश पहुंचा है। पिछले दिनों यह ट्रक चंदौली और वाराणसी तक पहुंच चुका था और अब यह गाजीपुर की ओर बढ़ चुका है।
- ओडिशा (पारादीप बंदरगाह)
- झारखंड
- बिहार
- उत्तर प्रदेश (चंदौली, वाराणसी, गाजीपुर, आगे लखीमपुर खीरी)
कुल भार और आकार के कारण वाहन सामान्य गति से आगे नहीं बढ़ पाता। जानकारी के मुताबिक यह एक दिन में करीब 10 से 20 किलोमीटर ही चलता है। चंदौली में दलदली जमीन के कारण ट्रक लगभग दो दिन रुका था और वहां आगे बढ़ाने के लिए अलग रास्ता तैयार करना पड़ा।
रास्ते में कई अवरोध हटाने पड़े हैं। ओवरब्रिज, हाईवे के बोर्ड, बिजली के तार और खंभे, साथ ही कुछ फुटओवर ब्रिज रास्ते में बाधा बन रहे हैं। आवश्यकतानुसार इन्हें अस्थायी रूप से हटाया या ऊपर उठाया जा रहा है ताकि वाहन सुरक्षित आगे बढ़ सके। ट्रक के साथ पुलिस और ट्रैफिक विभाग की टीम भी है, जो वाहन को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रही है।
गंतव्य और उपयोग
यह विशाल मशीन लखीमपुर खीरी के कुंभी स्थित बलरामपुर चीनी मिल तक पहुंचाई जा रही है। वहां इसे प्लांट में स्थापित कर चीनी से पीएलए बायोपॉलिमर तैयार करने की व्यवस्था की जा रही है। अधिकारियों का अनुमान है कि मशीन को उसके गंतव्य तक पहुंचने में अभी तीन से चार सप्ताह लग सकते हैं।
स्थानीय लोगों ने बड़े ट्रेलर की आवाज और धीमी रफ्तार पर ध्यान दिया है और कई स्थानों पर ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि इतने भारी उपकरण के सुरक्षित परिवहन के लिए यह धीमा और व्यवस्थित रास्ता आवश्यक है।
स्रोत: प्रभात खबर

