अलीगढ़। कचरा प्रबंधन में लापरवाही के चलते नगर निगम ने सोमवार को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) और धनीपुर मंडी समिति को नोटिस जारी किया है। दोनों संस्थानों से तीन दिन के भीतर जवाब देने को कहा गया है।
नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने कहा कि पहले भी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित पत्राचार कर आवश्यक जानकारी और कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद नियमों के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर यह कदम उठाया गया है। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया और नियमों का पालन नहीं हुआ तो निगम उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराएगा।
कौन आते हैं ‘बल्क वेस्ट जनरेटर’ में
नगर आयुक्त ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 का हवाला देते हुए बताया कि कुछ संस्थान “बल्क वेस्ट जनरेटर्स” की श्रेणी में आते हैं। ऐसे संस्थानों के लिए अपने परिसर में उत्पन्न कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण अनिवार्य है।
- प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थान
- 20 हजार वर्ग मीटर या उससे अधिक निर्मित क्षेत्रफल वाले संस्थान
- प्रतिदिन 40 हजार लीटर या अधिक पानी का उपभोग करने वाले संस्थान
निगम ने स्पष्ट किया कि यदि नियमों का अनुपालन नहीं हुआ तो पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही नगर निगम अन्य बड़े संस्थानों, होटल, रेस्टोरेंट और मैरिज होम में भी कचरा प्रबंधन की व्यवस्था की जांच करेगा।
एएमयू की ओर से प्राॅक्टर प्रोफेसर मोहम्मद नवेद खान ने कहा, “नगर निगम का नोटिस मिला है। इसका अवलोकन किया जा रहा है। नोटिस के हिसाब से बिंदुवार अपशिष्ट पदार्थों का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कराया जाना सुनिश्चित किया जाएगा।”
धनीपुर मंडी समिति के मंडी सचिव मुकेश त्रिपाठी ने बताया कि जिस निजी कंपनी पर मंडी में साफ-सफाई कराने का जिम्मा है उसे नियमों का पालन न करने पर नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने कहा, “मंडी में साफ-सफाई व वैज्ञानिक तरीके से कूड़ा निस्तारण पर जोर दिया जाएगा।”
नगर निगम का रुख साफ है कि शहर की स्वच्छता और पर्यावरण से जुड़े नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब तीन दिन के भीतर मिलने वाले जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
स्रोत: अमर उजाला

