अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अब मुकदमे की दिशा गवाहों की गवाही तय करेगी। अदालत में कुल 36,039 पन्नों का आरोप पत्र और 133 गवाहों की सूची दाखिल की गई है।
दाखिल आरोप पत्र और गवाहों की सूची के बाद सबसे ज्यादा नजर ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह और तत्कालीन महासचिव चंपत राय की गवाही पर है। महिपाल जनवरी 2021 से मई 2022 तक ट्रस्ट के लेखा प्रभारी रहे थे और चढ़ावे की गणना व लेखा व्यवस्था से जुड़े थे।
महिपाल और चंपत की भूमिका
महिपाल ने आरोपों में नकदी, सोना-चांदी और विदेशी मुद्रा से जुड़ी अनियमितताओं के सवाल उठाए थे और कहा था कि उन्होंने ट्रस्ट पदाधिकारियों को शिकायत दी थी। सितंबर में नई एसआईटी ने उनका क्रमवार बयान वीडियो कॉल के जरिए दर्ज किया था। अदालत में यह देखा जाएगा कि महिपाल ने क्या देखा, किसे और कब जानकारी दी और शिकायत के बाद क्या कार्रवाई हुई।
पूर्व महासचिव चंपत राय मामले में आरोपी नहीं हैं बल्कि अभियोजन पक्ष के गवाह हैं। आरोपपत्र में उनके खिलाफ आपराधिक संस्तुति नहीं की गई है। चंपत की गवाही चोरी की पहली सूचना और ट्रस्ट स्तर पर हुई कार्रवाई से जुड़ी घटनाओं को स्पष्ट करेगी।
आरोपपत्र के अनुसार चार जून को गणना कर्मियों ने चोरी से संबंधित वीडियो और संदेश चंपत को भेजे थे। अगले दिन कारसेवकपुरम स्थित उनके आवास पर डॉ. अनिल मिश्र, गोपाल राव समेत अन्य लोग पहुंचे और वीडियो देखा गया। डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव भी गवाह हैं और ट्रस्ट की व्यवस्थाओं से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं।
मुकदमे में गवाहों के बयानों का मिलान सीसीटीवी फुटेज, बरामदगी, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, दस्तावेजों और अन्य गवाहों के बयानों से किया जाएगा। अंतिम निर्णय अदालत उपलब्ध साक्ष्यों और पक्षों की जिरह के आधार पर करेगी।
स्थानीय लोगों के लिए अब यह मामला लंबित कानूनी प्रक्रिया बनकर सामने रहेगा और अगली सुनवाई में गवाहों की प्रत्यक्ष या पारित बयानबाजी पर ध्यान रखा जाएगा। अदालत कब किन गवाहों को बुलाएगी यह आगे के आदेशों से स्पष्ट होगा।
स्रोत: अमर उजाला

