अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की रकम की कथित चोरी के मामले में पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। चार्जशीट में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डाटा और कॉल डिटेल रिकॉर्ड को मुख्य साक्ष्य बताया गया है।
चार्जशीट के अनुसार अविनाश शुक्ला उर्फ शनि सीसीटीवी में कुल 85 बार चढ़ावे की रकम चोरी करते दिखाई दिया और चार बार अन्य अभियुक्तों को चोरी में मदद करते दिखा। करुणेश पांडेय दो बार चोरी करते और 68 बार सह-अभियुक्तों की मदद करते मिले। मनीष कुमार यादव 16 बार रकम अपने पास रखते और 19 बार सहयोग करते दिखे।
सीसीटीवी व मोबाइल सबूत
चार्जशीट में अनुकल्प मिश्रा 56 बार अन्य सह-अभियुक्तों को रकम हटाने में सहयोग करते दिखाई दिया। लवकुश मिश्रा एक बार चोरी करते और 52 बार मदद करते दिखे जबकि रमाशंकर मिश्र एक बार चढ़ावे की रकम अपने पास रखते नजर आए। पुलिस ने 25 से 30 जुलाई 2026 के फुटेज का भी उल्लेख किया है जिसमें गणना कक्ष में अविनाश रकम हटाते दिखाई देता है।
मोबाइल डाटा के विश्लेषण में अनुकल्प मिश्रा के फोन से अविनाश व लवकुश के साथ टेक्स्ट संदेश मिले। इन मैसेज में कैश के बंडलों को रखने, छिपाने, अदला-बदली और इधर-उधर ले जाने का जिक्र है। सीडीआर के अध्ययन में अभियुक्तों के बीच लगातार संपर्क मिलने को षड्यंत्र का संकेत माना गया है।
पुलिस ने जांच में करीब 700 बैंक खातों की पड़ताल की। इसमें ट्रस्टियों, आरोपितों, संदिग्धों, गणना कर्मियों और ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारियों के खाते शामिल थे। चार्जशीट में लिखा गया है कि चंपत राय के नाम कोई निजी बैंक खाता नहीं मिला। डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खातों के लेनदेन को भी अन्य आरोपितों के साथ जोड़ा गया।
आगे की कार्यवाही
चार्जशीट दाखिल होने के बाद कोर्ट में अधिवक्ता संघ ने विवेचना पर सवाल उठाए। संघ ने कहा कि कई शपथपत्रों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और कुछ व्यक्तियों को गवाह बनाया गया जबकि उनके खिलाफ प्रार्थनापत्र में साक्ष्य थे। संघ ने इन लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करने की मांग की है। आगे अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही अंतिम फैसला होगा।
स्रोत: अमर उजाला
