अयोध्या। राम मंदिर में अब वर्षभर वैदिक अनुष्ठानों का क्रम जारी रहेगा। धार्मिक समिति ने मंदिर में 365 दिन के अनुष्ठान की रूपरेखा तैयार कर ली है और पूर्णिमा से इसका संचालन शुरू हो गया।
रूपरेखा के अनुसार प्रत्येक माह के लिए अलग अनुष्ठानिक क्रम तय किया गया है। वर्षभर अनुष्ठान को निरंतर संचालित करने के लिए करीब 60 वैदिक आचार्यों की टीम का चयन कर लिया गया है।
रोजाना के अनुष्ठान और तैयारी
मंदिर में प्रतिदिन निर्धारित वैदिक विधि-विधान से याज्ञिक कर्म किए जा रहे हैं। अनुष्ठान के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और आहुतियों का क्रम जारी रहेगा। प्रतिदिन ऋग्वेद के मंत्रों के साथ यज्ञकुंड में एक हजार आहुतियां अर्पित की जा रही हैं।
पूजन और यज्ञ में प्रतिदिन करीब एक लीटर घी का उपयोग किया जा रहा है। आवश्यकता व निर्धारित अनुष्ठान के अनुसार टीम के आचार्य याज्ञिक कर्म में हिस्सा लेंगे। फिलहाल प्रतिदिन अनुष्ठान संपन्न कराने के लिए पांच वैदिक आचार्य लगाए गए हैं।
अनुष्ठानों का लक्ष्य और रूपरेखा मंदिर ट्रस्ट द्वारा बनाई गई है। संकल्पपूजन के मुख्य आचार्य विट्ठल महाराज ने कहा, “पूरे साल चलने वाले अनुष्ठानों की रूपरेखा मंदिर ट्रस्ट की ओर से तैयार की गई है। इसका उद्देश्य देश और समाज के कल्याण के साथ सनातन धर्म की उन्नति, दैवीय और भौतिक आपदाओं से बचाव तथा आकस्मिक संकटों के निवारण की कामना करना है।”
मंदिर के नियमित अनुष्ठान से स्थानीय तीर्थयात्रियों और श्रद्धालुओं को धार्मिक गतिविधियों में स्थिरता मिलने की उम्मीद है। पर्यटक और भक्त अब किसी विशेष अवसर पर ही नहीं, बल्कि साल भर मंदिर के याज्ञिक कर्मों का अनुभव कर सकेंगे।
आगे क्या होगा
मंदिर प्रबंधन ने बताया है कि तय रूपरेखा के अनुसार पूरे वर्ष अलग-अलग अवसरों और माह के अनुरूप वैदिक अनुष्ठान संपन्न कराए जाएंगे। श्रद्धालुओं को अनुष्ठानों के समय और कार्यक्रम के बारे में मंदिर की घोषणाओं पर नजर रखनी चाहिए।
स्रोत: अमर उजाला

