नई दिल्ली। बच्चों की पढ़ाई का खर्च आने वाले 10-15 साल में आज से बहुत अधिक हो सकता है। इसके मद्देनजर माता-पिता छोटी रकम से निवेश शुरू कर बड़े फंड की तैयारी कर सकते हैं।
एक विकल्प इंडेक्स फंड में एसआईपी है। इंडेक्स फंड वह म्यूचुअल फंड होता है जो किसी तय बाजार इंडेक्स को ट्रैक करता है और फंड मैनेजर अपने स्वेच्छा से शेयर नहीं चुनता।
कितना और कैसे शुरू करें
एसआईपी में हर महीने एक तय रकम निवेश की जाती है। उदाहरण के तौर पर माता-पिता बच्चे के नाम से अलग लक्ष्य बनाकर हर महीने 1000 रुपये की एसआईपी शुरू कर सकते हैं। बजट ज्यादा हो तो यह रकम 2000 रुपये प्रति माह रखी जा सकती है। एएमएफआई के मुताबिक एसआईपी 500 रुपये महीने जैसी छोटी रकम से भी शुरू की जा सकती है।
माना कि आप 15 साल तक हर महीने 2000 रुपये निवेश करते हैं। इस दौरान आपकी कुल जमा रकम 3.60 लाख रुपये होगी। ऊपर मिलने वाला रिटर्न बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा, इसलिए इसे तय रिटर्न नहीं समझना चाहिए।
लक्ष्य और जोखिम समझना जरूरी है। अगर बच्चे की पढ़ाई का समय 10-15 साल दूर है तो लंबी अवधि के कारण इक्विटी आधारित निवेश पर विचार करना फायदेमंद हो सकता है। हालांकि इक्विटी फंड में बाजार के उतार-चढ़ाव का जोखिम रहता है और निवेश की रकम घट सकती है।
निवेश शुरू करने से पहले यह तय करें कि लक्ष्य कितना बड़ा है और कितने साल बाद पैसे चाहिए। समय के साथ एसआईपी की रकम बढ़ाना एक तरीका है ताकि लागत में इन्फ्लेशन को कवर किया जा सके। जैसे-जैसे पढ़ाई का समय नज़दीक आए, पूरे पैसे को इक्विटी में रखने के जोखिम पर दोबारा विचार करें और जरूरत पड़ा तो सुरक्षित-अल्टरनेटिव्स अपनाएं।
अंत में, एसआईपी एक नियमित बचत और निवेश का तरीका है पर रिटर्न की गारंटी नहीं देता। इसलिए योजना बनाकर, लक्ष्य निर्धारित करके और जोखिम सहनशीलता का आकलन कर ही निवेश शुरू करें।
स्रोत: अमर उजाला

