बदायूं। राजा की सीकरी गांव में सरकारी भूमि पर कब्जा करने की नियत से बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा लगाने के प्रयास के बाद हुए बवाल के मामले में कोर्ट ने कायदा चले जाने का संदेश दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र पाल सिंह की अदालत ने तीन महिला अभियुक्तों सहित चार आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
अदालत ने पाया कि अभियुक्तों ने लोक-व्यवस्था ध्वस्त कर कानून विहीन माहौल पैदा किया और मौके पर मौजूद अधिकारियों व कई पुलिस कर्मियों व महिला पुलिस कर्मियों को चोटिल किया। न्यायाधीश ने कहा, “यह अपराध गंभीर प्रकृति का है.” सरकारी वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया।
घटना और प्राथमिकी
25 अगस्त को तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक सुभाष कुमार, थाना फैजगंज बेहटा ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि ग्राम राजा की सीकरी में कुछ ग्रामीणों ने गांव के नजदीक सड़क के पास खलिहान भूमि पर बिना शासन व उच्चाधिकारियों की अनुमति के प्रतिमा लगाने का प्रयास किया।
जब अधिकारियों ने समझाने का प्रयास किया तो वहां कुछ अराजक तत्वों ने मिलकर पुलिस-प्रशासन पर पथराव किया। इस घटना के बाद अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गईं और कई आरोपियों को जेल भेजा गया।
इस केस में पहले भी कई जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं। जेल भेजे गए अभियुक्तों में अनीता देवी, अजीत कुमार और लक्ष्मी की जमानत अर्जी 25 सितंबर को निरस्त की गई।
कुछ अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाएं अलग-अलग तारीखों पर खारिज हुई थीं। मनीता और दुर्वेश का जमानत पत्र 10 सितंबर को, अमर पाल, मुनेश कुमार व शिवम का जमानत पत्र 11 सितंबर को और उदयवीर की जमानत अर्जी 14 सितंबर को निरस्त की जा चुकी है।
गांव और आस-पास के लोग इस घटना और कोर्ट के आदेश से चिंतित हैं। पुलिस और प्रशासन ने इलाके में स्थिति नियंत्रित करने के लिए हालात पर नजर रखी हुई है और आगे की कानूनी कार्रवाही जारी रहेगी।
स्रोत: अमर उजाला

