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बलरामपुर: गेहूं गबन में सील छह समितियों की सील 15-16 सितंबर को खोले जाने के आदेश

डीएम ने 15 और 16 सितंबर को बी-पैक्स तुलसीपुर, कौवापुर व पचपेड़वा सहित छह समितियों की सील खोलकर माल व अभिलेखों की सूची तैयार कराने का निर्देश दिया।

बलरामपुर: गेहूं गबन में सील छह समितियों की सील 15-16 सितंबर को खोले जाने के आदेश
फोटो: अमर उजाला

बलरामपुर। जिले में गेहूं खरीद के दौरान मिले गबन के मामले में छह समितियों पर लगी सील को खोलने का आदेश जारी हुआ है। जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने इन समितियों की सील 15 और 16 सितंबर को हटाने के निर्देश दिए हैं।

सील खोलने के निर्देशित समितियों में बी-पैक्स समिति तुलसीपुर, कौवापुर, सुगानगर, गौरामाफी, मुड़िला और सहकारी संघ पचपेड़वा शामिल हैं। मामले की जांच में कुल 310.999 मीट्रिक टन गेहूं का स्टॉक नहीं मिलने का खुलासा हुआ है, जिसकी लागत करीब 81.01 लाख रुपये आंकी गई है।

केंद्रों का नुकसान और मूल्यांकन

जांच के दौरान नचौरा-नचौरी और कौवापुर केंद्रों पर कुल 228.764 मीट्रिक टन गेहूं गायब पाया गया। नचौरा-नचौरी केंद्र पर 67.111 मीट्रिक टन और कौवापुर केंद्र पर 161.653 मीट्रिक टन गेहूं का अभाव दर्ज किया गया। इन दोनों केंद्रों पर गायब गेहूं की कीमत 59,59,302.20 रुपये आंकी गई है।

वहीं भगवानपुर खादर केंद्र पर 82.240 मीट्रिक टन गेहूं नहीं मिला, जिसकी कीमत 21,42,352 रुपये निर्धारित की गई। सहकारिता विभाग की जांच में यह रिपोर्ट हुई कि इन केंद्रों पर खरीदे गए गेहूं का पूरा संप्रदान भारतीय खाद्य निगम को नहीं किया गया।

एआर सहकारिता अजय कुमार मौर्य ने बताया कि सील खोलने के काम के लिए तहसीलदार न्यायिक तुलसीपुर को मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात किया गया है। अपर जिला सहकारी अधिकारी तुलसीपुर को सकृत वस्तुओं की सूची (चार्जलिस्ट) तैयार कराने की जिम्मेदारी दी गई है। मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में ही सील खोलने की कार्रवाई संपन्न कराई जाएगी और तत्पश्चात उपलब्ध सामान व अभिलेखों की सूची बनवाई जाएगी।

इस मामले में सहकारिता विभाग ने प्रभारी सचिव श्रीप्रकाश सिंह को बी-पैक्स तुलसीपुर समेत संबंधित समितियों के सचिव पद से हटाया और उनके हस्ताक्षर की मान्यता निलंबित कर दी। तुलसीपुर व पचपेड़वा थानों में अलग-अलग रिपोर्ट दर्ज कराई गई हैं। तुलसीपुर मामले में पुलिस ने श्रीप्रकाश सिंह को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है।

जिला प्रशासन ने आगे की जांच और बचे हुए अभिलेखों की पड़ताल के बाद आगे की कार्रवाई के संकेत दिए हैं। प्रभावित समितियों की सूची और तैयार की जाने वाली चार्जलिस्ट से ही आगे के दोषी और वसूली के उपाय तय होंगे।

स्रोत: अमर उजाला

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Vikas Kumar

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कई वर्षों से समाचार, योजना, रोजगार इत्यादि मामलों से जुड़े कार्यों में संलग्न।