बाराबंकी। पिछले चार माह में जिले में बुखार के रोगियों की संख्या में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। अस्पतालों में इलाज कराने के लिए प्रतिदिन करीब 2,500 बुखार पीड़ित आ रहे हैं और दवाओं की खपत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।
दस्तावेजी विभागीय आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में पैरासीटामॉल की 50,00,000 (पचास लाख) गोलियां वितरित की गईं। साथ ही 31,00,000 बी कॉम्प्लेक्स की गोलियां, 17,00,000 से अधिक लिवोसिट्रीजन टैबलेट और लगभग 16,00,000 ओमेज कैप्सूल भी बांटे गए।
दवाओं की बढ़ी खपत
दवाओं की इस बढ़ी खपत से स्पष्ट होता है कि जुकाम, सर्दी और बुखार के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। अस्पतालों में ओपीडी और इमरजेंसी दोनों में बुखार वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है, जिससे मेडिकल स्टाफ पर दबाव बढ़ गया है।
फिजिशियन डॉ. राजेश कुशवाहा ने बताया कि पैरासीटामॉल का उपयोग बुखार और दर्द के इलाज में किया जाता है। उन्होंने कहा कि बी कॉम्प्लेक्स शरीर को ऊर्जा देने में सहायक होता है, जबकि लिवोसिट्रीजन एलर्जी व सर्दी-जुकाम के लक्षणों में दिया जाता है।
सीएमएस डॉ. जेपी मौर्य ने बताया कि पिछले तीन-चार महीनों में सर्दी, जुकाम और बुखार के मरीजों की संख्या काफी बढ़ी है। बढ़ते मामलों के कारण अस्पतालों में दवाइयों की खपत भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, उन्होंने यह भी कहा कि इंतजामों को और मजबूती दी जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि घरों में भी सर्दी-जुकाम के लक्षण तेजी से फैले हैं और लोग छोटे बच्चों व बुजुर्गों के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं। कई परिवार मरीजों के बढ़ते खर्च की शिकायत कर रहे हैं।
अस्पतालों ने कहा है कि अगर बुखार या सांस में तकलीफ जैसी गंभीर शिकायत हो तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। साथ ही डॉक्टरों की सलाह के बिना दवाइयों का अधिक उपयोग न करने की सलाह दी जा रही है।
स्रोत: अमर उजाला

