बाराबंकी। भारी बारिश के बाद कल्याणी नदी उफान पर आ गई है और नदी का पानी तटवर्ती इलाकों में फैल गया। रविवार को आई बाढ़ से करीब 150 बीघा धान की फसल जलमग्न होने की जानकारी मिली है।
बाढ़ से मसौली, लहबड़पुरवा, मेंढिया, अमदहा, मुंजापुर, देवकलिया, टेरासनी, बांसा और नियामतपुर के निचले खेतों में पानी भर गया है। प्रभावित क्षेत्र में धान की फसल पककर तैयार होने वाली थी, लेकिन कई स्थानों पर खेतों में कई दिनों तक पानी भरा रहने से फसल सड़ने का खतरा है।
खेतों और रास्तों पर असर
किसानों ने बताया कि पानी के चलते खेतों तक पहुंचने वाले रास्ते भी जलमग्न हो गए हैं और कई जगहों पर आवागमन ठप है। स्थानीय किसान रामू ने बताया कि फसल लगभग पक चुकी थी, अब लंबा पानी रहने पर उपज बर्बाद हो सकती है।
प्रभावित किसानों में रामेश्वर, झगरू, मुलतमिश और जगजीवन भी शामिल हैं। उन्होंने प्रशासन से तुरंत मौके पर आकर फसल नुकसान का आकलन कराने और नियमानुसार मुआवजा दिलाने की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन ने शीघ्र मुआवजा नहीं दिया तो कई किसान आर्थिक संकट में फंस सकते हैं। उन्होंने क्षतिपूर्ति के साथ-साथ जल्द से जल्द निचले खेतों से पानी निकासी के इंतजाम की भी अपील की है।
आगे क्या होगा
अब प्रशासनिक एजेंसियों से अपेक्षा है कि वे प्रभावित इलाकों का निरीक्षण कर नुकसान का आंकलन करें। जिन किसानों के खेत जलमग्न हुए हैं, उन्हें नुकसान का प्रमाण देने के लिए तैयार रहना होगा ताकि मुआवजा प्रक्रिया शुरू हो सके।
स्थानीय लोगों से कहा गया है कि वे सुरक्षित स्थानों पर रहें और पानी से घिरे खेतों में बेवजह जाने से बचें जब तक जलस्तर नीचे नहीं आता। प्रशासन की ओर से किसी तरह के राहत कार्य और नोटिस जारी होने की प्रतीक्षा है।
स्रोत: अमर उजाला

