बरेली। दो दिन में हुई तेज बारिश और हवा से जिले के कई खेतों में खड़ी फसलें बिछ गईं। कटाई के पहले ही मौसम ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है और कई जगह धान-गन्ने के साथ दलहनी फसलों में भी सड़न-फंगस का खतरा बढ़ गया है।
फसलों का नुकसान और रकबा
कृषि विभाग को खेतों से नुकसान की कई सूचनाएं मिलीं। विभाग ने तुरंत सभी विकासखंडों में तैनात अधिकारियों को नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। सोमवार से विशेष टीमें गांव-गांव जाकर फसलों की स्थिति का जमीनी सर्वे करेंगी और उसके बाद नुकसान की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
खरीफ फसलों का जिलेवार रकबा इस प्रकार है:
- धान: 1,58,627.44 हेक्टेयर
- गन्ना: करीब 1.25 लाख हेक्टेयर
- उड़द: 15,063.51 हेक्टेयर
- बाजरा: 7,761 हेक्टेयर
- तिल: 6,365.64 हेक्टेयर
- ज्वार: 4,124 हेक्टेयर
- मूंग: 1,398.14 हेक्टेयर
- मक्का: 946 हेक्टेयर
- अरहर: 360.04 हेक्टेयर
- अन्य फसलें (श्रीअन्न, मूंगफली, सोयाबीन): छोटे रकबे पर हैं
कृषि उपनिदेशक ओपी मिश्र ने बताया कि भारी बारिश के चलते धान, गन्ना समेत अन्य फसलों को बड़ा नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया है कि जलभराव को रोकने के लिए खेतों से पानी निकालें और जलनिकासी की व्यवस्था करें ताकि फसल को और नुकसान न हो।
किसानों के लिए सलाह और आगे की कार्रवाई
जिन किसानों ने फसल बीमा कराया है, उन्हें 48 घंटे के भीतर फसल बीमा योजना का लाभ लेने की सलाह दी जा रही है। विभाग ने कहा है कि नुकसान की सूचना संबंधित टोल-फ्री नंबर पर दी जा सकती है और किसी भी असुविधा पर स्थानीय ब्लॉक या कृषि अधिकारी से संपर्क करें।
सरकारी टीमों के सर्वे के बाद ही मुआवजे या अन्य रियायतों का दायरा तय होगा। अभी किसानों को खेतों में पानी लंबे समय तक न रोकने और फसलों की स्थिति नियमित रूप से देखने की हिदायत दी गई है।
स्रोत: अमर उजाला

