नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में बिजली और ऊर्जा की पहुंच बढ़ाने की बात की और खुलकर तारीफ की। यह टिप्पणी उन्होंने ‘एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट’ के एक कार्यक्रम के दौरान की।
अल्बानीज ने कार्यक्रम में कहा, ‘मानव इतिहास के किसी भी दशक, क्षेत्र या देश की तुलना में पीएम मोदी के कार्यकाल में सबसे अधिक लोगों को ऊर्जा तक पहुंच प्रदान की गई है।’ उन्होंने एक और बात भी कही: ‘उनके कहने पर 40 हजार लोगों ने मेरे लिए लगाए नारे’।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए रणनीति
स्रोतों के अनुसार, भारत ने ऊर्जा आपूर्ति पर असर डालने वाले जोखिमों से निपटने के लिए अपनी आयात नीति में बदलाव किया है। संसद के बजट सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा को बताया था कि पहले देश 27 देशों से ऊर्जा का आयात करता था, जिसे बढ़ाकर 41 देशों तक कर दिया गया है।
सरकार अब 41 अलग-अलग देशों से कच्चा तेल, एलपीजी और पीएनजी प्राप्त कर रही है। यह रणनीति विशेष रूप से उस समय महत्वपूर्ण मानी जा रही है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और अमेरिका, इज़राइल, ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति की वजह से समुद्री आवाजाही बाधित है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आयात स्रोतों में विविधता लाने से आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता कम होगी और घरेलू बाजार में पेट्रोल व डीजल की उपलब्धता बनी रहेगी। सरकार ने पश्चिम एशिया संघर्ष के आर्थिक असर व सप्लाई चेन पर व्यापक समीक्षा के बाद यह मार्ग अपनाया।
इसका प्रत्यक्ष असर पड़ोसी देशों पर भी देखा जा रहा है जहाँ ऊर्जा संकट गहराया हुआ है। अल्बानीज की तारीफ को वैश्विक मंच पर मोदी सरकार की ऊर्जा नीतियों की अंतरराष्ट्रीय मान्यता के रूप में देखा जा रहा है।
आगे की कार्रवाई में सरकार की तैयारियाँ और आयात स्रोतों का रूट मैप स्थानीय तेल और गैस आपूर्तिकर्ताओं के साथ समन्वय में जारी रहेंगे। नागरिकों को ईंधन आपूर्ति में संभावित व्यवधान की खबरों पर सरकारी सूचनाओं पर ही भरोसा रखना चाहिए।
स्रोत: अमर उजाला

